सुपौल में सुरसर नदी पर बना पुल खतरे में, ध्वस्त अप्रोच पथ से हजारों लोगों की बढ़ी परेशानी
जदिया (सुपौल) पप्पू मेहता की रिपोर्ट:
सुपौल जिले के जदिया क्षेत्र में कोरियापट्टी पंचायत भवन के समीप एसएच-91 को ठाकुरबाड़ी के पास एनएच-327 ई से जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बनी हुई है। सुरसर नदी पर बने पुल के दोनों ओर का अप्रोच पथ पूरी तरह ध्वस्त हो जाने से इस मार्ग पर आवागमन संकट में पड़ गया है। सड़क कटकर बह जाने के कारण पुल के दोनों सिरों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं और कई जगह सड़क की पिच हवा में लटकती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द मरम्मत नहीं हुई तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
बारिश और कटाव ने बढ़ाया खतरा
ग्रामीणों के अनुसार, हाल के दिनों में हुई बारिश और सुरसर नदी के तेज बहाव के कारण पुल के दोनों किनारों की मिट्टी तेजी से कटने लगी। धीरे-धीरे अप्रोच पथ का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया। अब स्थिति यह है कि पुल और सड़क के बीच गहरा खाली हिस्सा बन चुका है। सड़क के नीचे की मिट्टी पूरी तरह बह जाने से पुल का किनारा खोखला हो गया है और उसके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।
छोटे वाहन किसी तरह निकल रहे, बड़े वाहनों की आवाजाही बंद
सड़क ध्वस्त होने के कारण इस मार्ग पर चारपहिया और मालवाहक वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मोटरसाइकिल और ई-रिक्शा जैसे छोटे वाहन किसी तरह जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं, लेकिन बड़े वाहनों के लिए रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय इस रास्ते से गुजरना बेहद खतरनाक हो गया है। प्रशासन की ओर से न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब पुल पर ग्रामीण मक्का सुखाने लगते हैं, जिससे सड़क और भी संकरी हो जाती है।
हजारों लोगों की लाइफलाइन बनी यह सड़क
यह सड़क इलाके के हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। इसी मार्ग से खूंट, नाढी, ठाकुरबाड़ी समेत आसपास के कई गांवों के लोग जदिया बाजार, त्रिवेणीगंज और एनएच-327 ई तक पहुंचते हैं। सड़क टूटने के कारण लोगों को अब कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
सबसे अधिक परेशानी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में हो रही है। वहीं, मक्के की फसल तैयार होने के बावजूद किसान अपनी उपज ट्रैक्टर और मालवाहक वाहनों से बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
‘शोक नदी’ के नाम से मशहूर है सुरसर
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि सुरसर नदी वर्षों से तेज कटाव और धारा बदलने के लिए कुख्यात रही है। हर साल यह नदी उपजाऊ जमीन और सड़कों को नुकसान पहुंचाती है। इसी वजह से इलाके में लोग इसे ‘शोक नदी’ के नाम से भी जानते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से कटाव की समस्या बनी रहने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी कटावरोधी कार्य नहीं कराया गया।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि मानसून की अगली बारिश से पहले बैरिकेडिंग, मजबूत अप्रोच पथ निर्माण और कटावरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया, तो पूरी सड़क नदी में समा सकती है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।