Kosi Live-कोशी लाइव BIHAR:मौसेरे भाई ने बनाया संबंध, गर्भवती होने पर छोड़ा साथ; जमुई में डेढ़ साल की बेटी लेकर दर-दर भटक रही सिंपू - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Monday, May 4, 2026

BIHAR:मौसेरे भाई ने बनाया संबंध, गर्भवती होने पर छोड़ा साथ; जमुई में डेढ़ साल की बेटी लेकर दर-दर भटक रही सिंपू

सिमुलतला (जमुई)। रिश्तों में जब स्वार्थ और धोखे का जहर घुलता है, तो उसकी सबसे ज्यादा मार महिलाओं और मासूम बच्चों पर पड़ती है। जमुई जिले के सिमुलतला थाना अंतर्गत खुरंडा गांव से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने समाज के दोहरे चरित्र और पारिवारिक रिश्तों की उलझनों को उजागर कर दिया है।

झारखंड के गिरिडीह कोल्डीहा की रहने वाली सिंपू कुमारी का आरोप है कि उसका अपने मौसेरे भाई संतोष कुमार पिता जनार्दन पंडित के साथ पिछले दो वर्षों से गहरा संबंध था। इस रिश्ते से उनकी डेढ़ साल की एक बेटी है और सिंपू वर्तमान में चार महीने की गर्भवती भी है।

सिंपू का कहना है कि वे दिल्ली में साथ रहते थे, लेकिन अब संतोष ने उसे और उसके बच्चों को अपनाने से इनकार कर दिया है।संतोष के छोटे भाई की शादी 10 मई को होने वाली है, जिसके लिए पूरा परिवार और रिश्तेदार खुरंडा गांव में जुटे हुए हैं।

इसी बीच, अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सिंपू भी गांव पहुंची। महिला अधिकारों के लिए सक्रिय कनक सिंह वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति एवं बजरंग सेना के नेतृत्व में सिंपू ने अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया और संतोष से अपने बच्चों को अधिकार देने की मांग की।

संतोष का भाभी से संबंध

इस कहानी का एक और चौंकाने वाला पहलू भी सामने आया है। सिंपू का आरोप है कि संतोष का उसकी अपनी भाभी शिवानी के साथ संबंध है, जो उसके भाई जितेंद्र की पत्नी है।

सिंपू का दावा है कि इसी अवैध लगाव के कारण संतोष उसे अपनाने को तैयार नहीं है। हालांकि, शिवानी ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है।

सिमुलतला थाना में सिंपू कुमारी ने अपनी व्यथा सुनाई। थानाध्यक्ष रूबी कुमारी ने बताया कि चूंकि घटना का अधिकांश हिस्सा दिल्ली में रहने के दौरान का है, पुलिस पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच कर रही है।

तथ्यों की पुष्टि के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए कुछ गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

रिश्तों की मर्यादा: क्या आधुनिकता की दौड़ में हम पारिवारिक मर्यादा और सामाजिक उत्तरदायित्व को भूलते जा रहे हैं?
मासूमों का दोष क्या?: बड़ों की गलतियों की सजा उन मासूम बच्चों को क्यों मिले, जिनका भविष्य अब अनिश्चितता के साए में है?
जागरूकता ही बचाव है: ऐसे मामलों में अक्सर देखा जाता है कि सामाजिक दबाव या लोक-लाज के कारण महिलाएं चुप रह जाती हैं। सिंपू का पुलिस तक पहुंचना यह दर्शाता है कि अब न्याय के लिए आवाज़ उठाना समय की मांग है।

यह मामला एक चेतावनी है कि रिश्तों में अंधा विश्वास करने से पहले कानूनी और सामाजिक सुरक्षा के पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।