बिहार में शराबबंदी खत्म करने की तैयारी? चरणबद्ध छूट के प्लान पर तेज हुई चर्चा
नई सरकार के गठन के बाद अटकलें तेज
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से ही शराबबंदी कानून की समीक्षा और इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार राजस्व के भारी नुकसान और कानून के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों को देखते हुए नई रणनीति पर विचार कर रही है।
क्यों उठ रही है शराबबंदी हटाने की मांग?
जानकारों का मानना है कि शराबबंदी की वजह से राज्य को हर साल करीब 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। शराबबंदी लागू होने से पहले उत्पाद विभाग से सरकार को कुल बजट का 12 से 15 प्रतिशत तक राजस्व मिलता था। अब सत्ता पक्ष के कई नेताओं और विधायकों के बीच भी इस कानून की समीक्षा की मांग उठ रही है।
10 वर्षों में क्या रहा असर?
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 10 वर्षों में शराबबंदी कानून के तहत—
- करीब 16 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया
- लगभग 4.5 करोड़ लीटर शराब नष्ट की गई
- इसके बावजूद अवैध शराब की आपूर्ति और खपत पूरी तरह बंद नहीं हो सकी
इसी कारण कानून की प्रभावशीलता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
सरकार का फेज-वाइज प्लान क्या हो सकता है?
सूत्रों के अनुसार सरकार शराबबंदी को अचानक समाप्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से राहत देने पर विचार कर सकती है। संभावित योजना में ये बिंदु शामिल बताए जा रहे हैं—
विदेशी पर्यटकों को पहले छूट
सबसे पहले फाइव स्टार होटलों में विदेशी पासपोर्ट धारकों के लिए सीमित शराब सुविधा शुरू की जा सकती है।
पर्यटन को बढ़ावा
बिहार में नए होटल और पर्यटन ढांचे के विकास को देखते हुए पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है।
सीमित दायरे में शुरुआत
सरकार शुरुआत में इसे आम जनता के बजाय केवल बाहर से आने वाले लोगों और पर्यटकों तक सीमित रख सकती है।
नीतीश कुमार को मनाना सबसे बड़ी चुनौती
शराबबंदी को पूर्व मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता रहा है। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
महिला वोट बैंक पर भी नजर
सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क बताई जा रही है कि शराबबंदी हटाने से महिला मतदाताओं के बीच नकारात्मक संदेश जा सकता है। इसी वजह से किसी भी फैसले में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का ध्यान रखा जा सकता है।