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Sunday, April 26, 2026

BIHAR:नीलगायों पर बड़ा एक्शन: 6 घंटे के शूट आउट में 58 घोड़परास ढेर, किसानों को मिली राहत

बेगूसराय में नीलगायों पर बड़ा एक्शन: 6 घंटे के शूट आउट में 58 घोड़परास ढेर, किसानों को मिली राहत

बेगूसराय: जिले के भगवानपुर प्रखंड में नीलगायों (घोड़परास) के आतंक से परेशान किसानों के लिए शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। वन विभाग की टीम ने विशेष अभियान चलाते हुए महज 6 घंटे के भीतर 58 नीलगायों को मार गिराया। इस कार्रवाई के बाद लंबे समय से फसल बर्बादी झेल रहे किसानों में उम्मीद जगी है।

15 पंचायतों में मचा रखा था आतंक

जानकारी के अनुसार भगवानपुर प्रखंड की 15 पंचायतों में पिछले कई महीनों से नीलगायों का आतंक बना हुआ था। ये जंगली जानवर किसानों की दलहन, तेलहन और मक्के की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे थे। कई किसान खेती छोड़ने की स्थिति में पहुंच गए थे।

दोपहर 12 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन

शनिवार दोपहर करीब 12 बजे वन विभाग की टीम रसलपुर पंचायत के औगान और रसलपुर बहियार इलाके में पहुंची। वन विभाग के शूटर शक्ति कुमार के नेतृत्व में अभियान शुरू हुआ। जैसे ही फायरिंग शुरू हुई, नीलगायों के झुंड में भगदड़ मच गई। शाम करीब 6 बजे तक चले अभियान में कुल 58 नीलगायों को ढेर कर दिया गया।

मौके पर मौजूद रहे किसान

अभियान के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय किसान भी मौके पर मौजूद रहे। किसानों ने बताया कि नीलगाय न सिर्फ फसल चर जाती हैं, बल्कि दौड़ते समय पैरों से कुचलकर पूरी फसल बर्बाद कर देती हैं। इससे मेहनत और लागत दोनों बर्बाद हो जाती है।

मुखिया ने की थी कार्रवाई की मांग

रसलपुर पंचायत के मुखिया लक्ष्मण कुमार राय ने किसानों की समस्या को देखते हुए वन विभाग को लिखित आवेदन दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते नीलगायों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो हजारों किसान आर्थिक रूप से तबाह हो जाएंगे।

जेसीबी से दफनाए गए शव

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान को पूरी सुरक्षा और प्रोफेशनल तरीके से चलाया गया, ताकि किसी इंसान या पालतू पशु को नुकसान न पहुंचे। मारे गए सभी नीलगायों को अलग-अलग स्थानों पर जेसीबी की मदद से दफना दिया गया।

किसानों की मांग- अन्य पंचायतों में भी चले अभियान

हालांकि 58 नीलगायों के मारे जाने के बाद भी ग्रामीणों का कहना है कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई बहियारों में अब भी नीलगायों के झुंड सक्रिय हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रखंड की अन्य पंचायतों में भी नियमित रूप से ऐसा अभियान चलाया जाए, ताकि फसलों को बचाया जा सके।