सहरसा में 79 गांवों की जमीन पर सरकार की बड़ी रोक: खरीद-बिक्री बंद, नए मकान निर्माण पर भी पाबंदी
बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला, 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी रोक
सहरसा। बिहार सरकार ने सहरसा सहित राज्य के कई शहरों के सुनियोजित विस्तार और आधुनिक विकास को लेकर बड़ा एवं सख्त फैसला लिया है। बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की अहम बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें सहरसा के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और नए भवन निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
यह फैसला सहरसा शहर पर बढ़ते आबादी दबाव, ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित शहरी विस्तार को नियंत्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
31 मार्च 2027 तक रहेगी पाबंदी
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, पुराने सहरसा शहर पर लगातार बढ़ते दबाव को कम करने के लिए शहर से सटे बाहरी इलाकों में आधुनिक ग्रीनफील्ड एवं सैटेलाइट टाउनशिप बसाने की तैयारी की जा रही है।
जब तक इस नए क्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार कर अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक 31 मार्च 2027 तक इन चिन्हित क्षेत्रों में:
- जमीन की खरीद-बिक्री
- रजिस्ट्री
- हस्तांतरण
- नए भवन निर्माण
- बिना अनुमति किसी तरह का विकास कार्य
पर पूर्ण रोक रहेगी।
तीन प्रखंडों के 79 गांव शामिल
सरकार द्वारा तैयार किए गए इस मास्टर प्लान में सहरसा शहर से सटे तीन प्रमुख प्रखंडों के कुल 79 गांवों को शामिल किया गया है। ये गांव मुख्य रूप से:
- कहरा प्रखंड
- सत्तरकटैया प्रखंड
- सौरबाजार प्रखंड
के अंतर्गत आते हैं।
सरकार की योजना इन ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी इलाकों को आधुनिक सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित करने की है।
कितने गांव किस अंचल से शामिल
प्राप्त जानकारी के अनुसार:
- सत्तरकटैया अंचल – 21 राजस्व ग्राम
- कहरा अंचल – 34 राजस्व ग्राम
- सौरबाजार अंचल – 24 राजस्व ग्राम
कुल मिलाकर 79 गांव इस योजना क्षेत्र में शामिल किए गए हैं।
4 लाख 61 हजार लोगों को होगा फायदा
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सहरसा नगर एवं आसपास की कुल 4,61,052 आबादी को शामिल किया गया है।
योजना क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 294.19 वर्ग किलोमीटर निर्धारित किया गया है, जिसमें:
- 35.89 वर्ग किमी शहरी क्षेत्र
- 258.30 वर्ग किमी ग्रामीण क्षेत्र
शामिल है।
महानगरों जैसी सुविधाएं मिलेंगी
सरकार का उद्देश्य सहरसा में बेतरतीब और बिना नक्शे के विकसित हो रही कॉलोनियों को रोकना है। मास्टर प्लान लागू होने के बाद इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से विकास होगा।
संभावित सुविधाएं:
- चौड़ी एवं आधुनिक सड़कें
- पार्क और खेल मैदान
- ड्रेनेज सिस्टम
- पेयजल व्यवस्था
- निर्बाध बिजली आपूर्ति
- अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
- आवासीय कॉलोनियां
- व्यापारिक क्षेत्र एवं रोजगार केंद्र
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस ग्रीनफील्ड टाउनशिप से सहरसा में आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र विकसित होंगे। इससे:
- स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा
- व्यापार बढ़ेगा
- निवेश आएगा
- रियल एस्टेट सेक्टर को भविष्य में बड़ा लाभ होगा
जमीन मालिकों और बिल्डरों में हलचल
सरकार के इस फैसले के बाद कहरा, सत्तरकटैया और सौरबाजार के चिन्हित गांवों में जमीन मालिकों, प्रॉपर्टी डीलरों और बिल्डरों के बीच हलचल तेज हो गई है।
जो लोग वहां जमीन खरीदने या मकान बनाने की तैयारी कर रहे थे, उन्हें अब मास्टर प्लान लागू होने तक इंतजार करना होगा।
जानकारों ने बताया जरूरी फैसला
नगर नियोजन विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि यदि अभी रोक नहीं लगाई जाती तो आने वाले समय में सहरसा भी अव्यवस्थित कॉलोनियों, जाम और जलजमाव जैसी गंभीर समस्याओं से जूझता।
इसलिए भविष्य के सुंदर, व्यवस्थित और आधुनिक सहरसा के निर्माण के लिए यह कदम बेहद जरूरी माना जा रहा है।