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Saturday, March 28, 2026

पूर्णिया में IG की बड़ी कार्रवाई: दहेज हत्या केस दबाने पर थानाध्यक्ष व IO सस्पेंड, SDPO पर भी गिरी गाज

हेडलाइन:
पूर्णिया में IG की बड़ी कार्रवाई: दहेज हत्या केस दबाने पर थानाध्यक्ष व IO सस्पेंड, SDPO पर भी गिरी गाज

खबर:
पूर्णिया। पूर्णिया प्रक्षेत्र के आईजी विवेकानंद ने पुलिस महकमे में कर्तव्यहीनता, लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मरंगा थाना कांड संख्या 141/24 की समीक्षा के दौरान गंभीर अनियमितताएं और जांच में जानबूझकर ढिलाई सामने आने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष रूपक रंजन और अनुसंधानकर्ता ज्योति चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय पुलिस केंद्र, पूर्णिया निर्धारित किया गया है।

इसके साथ ही आईजी ने तत्कालीन सदर एसडीपीओ-01 पंकज शर्मा और एक अन्य एसडीपीओ के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजा है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

एक महीने तक दबा रहा दहेज हत्या का केस
जानकारी के अनुसार, मरंगा थाना क्षेत्र के नया टोला गंगेली निवासी कृष्णदेव सिंह की पुत्री सोनम नयन की 14 जून 2024 को भागलपुर के मायागंज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि साढ़े चार लाख रुपये तिलक की मांग पूरी नहीं होने पर पति गुरु प्रसाद दास, ससुर हीरा लाल मंडल और देवर शशिकांत ने मिलकर उसे जिंदा जला दिया।

भागलपुर की बरारी पुलिस द्वारा 15 जून 2024 को फर्दबयान भेजे जाने के बावजूद मरंगा पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की। आरोप है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष रूपक रंजन ने इस गंभीर मामले को करीब एक महीने तक दबाकर रखा और 12 जुलाई 2024 को केस दर्ज किया गया। इस देरी के कारण आरोपियों को साक्ष्य मिटाने और फरार होने का पर्याप्त समय मिल गया।

जांच और पर्यवेक्षण पर भी उठे सवाल
आईजी की समीक्षा में पाया गया कि अनुसंधानकर्ता ज्योति चौरसिया ने भी जांच में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई और मामले को सही दिशा में नहीं ले गईं। वहीं तत्कालीन सदर एसडीपीओ पंकज शर्मा के पर्यवेक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आईजी ने माना कि वरिष्ठ अधिकारियों की लापरवाही के कारण न्याय प्रक्रिया बाधित हुई और आरोपियों को अप्रत्यक्ष लाभ मिला।

पहले भी विवादों में रहे थानाध्यक्ष
निलंबित थानाध्यक्ष रूपक रंजन की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है। इससे पूर्व कोढ़ा के एक मामले में लापरवाही के आरोप में उन्हें डीआईजी द्वारा लाइन हाजिर कर पूर्णिया पुलिस लाइन भेजा गया था। वर्तमान में वह टेक्निकल सेल के प्रभारी के रूप में तैनात थे।

एसपी स्वीटी सहरावत ने निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा कि आईजी की कार्रवाई यह स्पष्ट संदेश है कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति केवल अपराधियों पर ही नहीं, बल्कि लापरवाह पुलिसकर्मियों पर भी समान रूप से लागू होगी। यह मामला अब पूरे बिहार पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है।