दरअसल, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 62(5) के अनुसार जेल में बंद व्यक्ति मतदान नहीं कर सकता। हालांकि अदालत से अनुमति मिलने पर वह मतदान कर सकता है। इसी आधार पर अनंत सिंह को वोट डालने की इजाजत मिली है। वहीं यह चुनाव एनडीए के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी हुई है क्योंकि पांचों सीटों को जीतने के लिए एनडीए ने पांच उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं राजद भी एक सीट पर जीत हासिल करने लिए लड़ाई में उतरी है। तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी से एडी सिंह को उम्मीदवार बनाया है।
बता दें कि, अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने लिए एनडीए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। बिहार विधानसभा में एनडीए के 202 विधायकों के संख्या बल के कारण चार सीट तो एनडीए जीत जाएगी जबकि पांचवीं सीट के लिए 38 विधायक ही बचते हैं। एनडीए खेमे से एक विधायक जदयू के मोकामा से निर्वाचित अनंत सिंह जेल में हैं। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके मतदान के लिए उन्हें जेल से बाहर आना होगा।
मालूम हो कि इस मामले शुक्रवार को बड़ा फैसला हुआ था। एमपी एमएलए कोर्ट ने फैसला दिया था कि अनंत सिंह राज्यसभा चुनाव में वोट डालेंगे। वे कस्टडी में विधानसभा आयेंगे और वोट डालकर वापस जेल जायेंगे। गौरतलब हो कि, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में हुए दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में अनंत सिंह जेल में हैं। ऐसे में अब उनको वोट डालने के लिए कोर्ट से मिली राहत ने एनडीए को भी बड़ी राहत दी है। इससे प्रतिष्ठा की लड़ाई में एनडीए को बड़ी राहत होगी।