पटना। बिहार विधानसभा में बंदोबस्त की जमीन पर बाहरी लोगों के कब्जे के आरोपों पर सरकार ने सख्त रुख दिखाया है।
उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि यदि इस संबंध में ठोस साक्ष्य दिए जाते हैं तो राज्य सरकार उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर व्यापक जांच कराएगी।
बंदोबस्त जमीन पर बाहरी का कब्जा
मंत्री शुक्रवार को विधानसभा की दूसरी पाली में गैर सरकारी संकल्प का जवाब दे रहे थे। ठाकुरगंज के विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से यह मुद्दा उठाया और कहा कि किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड की बंदोबस्त जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा है।
मंत्री ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि किशनगंज के समाहर्ता से मिली रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के मालदा-मुर्शिदाबाद के लोगों द्वारा अवैध कब्जे का कोई ठोस मामला सामने नहीं आया है।
गड़बड़ी पाई गई तो रद की जाएगी जमाबंदी
फिर भी सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। मंत्री ने साफ किया कि अगर बंदोबस्ती भूमि की अवैध खरीद-बिक्री या हस्तांतरण पाया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के नाम की जमाबंदी रद्द कर दी जाएगी और जमीन दोबारा सरकार के अधिकार में ले ली जाएगी।
गरीबों, दलितों और वंचित परिवारों को दी गई जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि यदि सदस्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं तो राज्य सरकार उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर पूरे मामले की व्यापक जांच कराएगी।
बाहरी लोगों का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं
किसी भी परिस्थिति में गरीबों की बंदोबस्ती भूमि पर बाहरी लोगों का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र स्तर पर भी इस विषय को गंभीरता से लिया जा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीमांचल क्षेत्र में भूमि विवादों की रोकथाम और समाधान के लिए प्रयासरत हैं। मंत्री सिन्हा ने दोहराया कि सरकार गरीबों को दी गई जमीन की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।