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Friday, January 2, 2026

MADHEPURA:SDM की रोक से भड़के खिलाड़ी, सरौनी कला काली स्थान प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना शुरू

SDM की रोक से भड़के खिलाड़ी, सरौनी कला काली स्थान प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना शुरू

बिहारीगंज (मधेपुरा)।
बिहारीगंज थाना क्षेत्र के सरौनी कला काली स्थान प्रांगण में 2 जनवरी से प्रस्तावित प्रखंड स्तरीय सरदार वल्लभभाई पटेल क्रिकेट टूर्नामेंट पर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) द्वारा रोक लगाए जाने के बाद स्थानीय खिलाड़ियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। शुक्रवार को दर्जनों खिलाड़ी और ग्रामीण काली स्थान प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए।

कई वर्षों से होता रहा है आयोजन

ग्रामीणों के अनुसार, यह मैदान पिछले कई वर्षों से स्थानीय युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। हर साल यहां क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन होता रहा है, जिसमें सरौनी कला के साथ-साथ आसपास के गांवों के खिलाड़ी भी भाग लेते हैं।

तैयारियों पर फिर गया पानी

खिलाड़ियों ने बताया कि टूर्नामेंट की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती है। अभ्यास, टीम चयन, प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं में काफी मेहनत की जाती है। ऐसे में अंतिम समय में प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने से खिलाड़ियों का मनोबल टूट गया है।

राजनीतिक भावना से प्रेरित निर्णय का आरोप

धरनास्थल पर मौजूद मुखिया प्रतिनिधि मुकेश कुमार मुन्ना ने बताया कि सरौनी कला की मुखिया पूनम कुमारी ने 17 दिसंबर को ही खेल आयोजन की अनुमति के लिए आवेदन दिया था। बावजूद इसके एसडीएम ने बिना किसी ठोस कारण के राजस्व क्षति का हवाला देकर आवेदन रद्द कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय राजनीतिक भावना से प्रेरित है।

राजस्व क्षति का दिया गया हवाला

मुकेश कुमार मुन्ना ने बताया कि मंदिर के उपाध्यक्ष और सरपंच भीम मंडल ने टूर्नामेंट रोकने के लिए एसडीएम को आवेदन दिया था। इसके बाद न्यास समिति के अध्यक्ष सह एसडीएम ने यह कहते हुए आयोजन रद्द कर दिया कि वहां हाट लगता है और इससे राजस्व की क्षति होगी।

हाट व्यवस्था पर असर नहीं — ग्रामीण

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मंदिर प्रांगण में हाट के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है और टूर्नामेंट से न तो हाट की व्यवस्था बाधित होती है और न ही किसी प्रकार की राजस्व हानि होती है।

खेल संस्कृति का प्रतीक है मैदान

ग्रामीणों का कहना है कि यह मैदान केवल खेल का स्थान नहीं, बल्कि गांव की एकता, अनुशासन और खेल संस्कृति का प्रतीक है। अचानक लगाए गए प्रतिबंध से पूरे गांव के खेलप्रेमियों की भावनाएं आहत हुई हैं।

निर्णय वापस नहीं हुआ तो धरना जारी रहेगा

धरनास्थल पर मौजूद खिलाड़ियों और ग्रामीणों ने प्रशासन से अपने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक टूर्नामेंट की अनुमति बहाल नहीं होती, तब तक उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।