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Thursday, January 8, 2026

BIHAR:JDU में बड़े बदलाव के संकेत, नीतीश के बेटे निशांत की एंट्री तय, संगठन में मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को लेकर अटकलों के बीच अब जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में उनके बेटे निशांत कुमार की संभावित भूमिका को लेकर मंथन चल रहा है.

पार्टी के बड़े तबके का यह मानना है कि नीतीश के बाद निशांत कुमार पार्टी के लिए बेहद जरूरी भी हैं और मजबूरी भी. यही वजह है कि जेडीयू के अंदर से निशांत के राजनीति में सक्रिय होने की मांग बार-बार उठती रही है.

ऐसे में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मांग को देखते हुए निशांत कुमार जल्द ही पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका में नजर आ सकते है. जेडीयू सूत्रों के मुताबिक इस साल मार्च में दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है. कार्यकारिणी की बैठक से निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में भूमिका को लेकर कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा सकता है.

निशांत कुमार के लिए 2 विकल्प पर चर्चा

पार्टी से जुड़े सूत्रों का मानना है कि जेडीयू निशांत कुमार को उनकी विरासत के अनुसार ही पद चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं की भावनाओं के साथ न्याय हो सके. ऐसे में कुछ विकल्प है जिन पर चर्चा चल रही है. पहला विकल्प ये है कि निशांत कुमार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया जाए. दूसरा विकल्प पार्टी में महासचिव बनाकर संगठन की बारीकियों से रूबरू कराने और पूरे बिहार में दौरे कराने का है.

जेडीयू नेताओं का मानना है कि निशांत कुमार को लेकर बिहार के युवाओं में क्रेज है, जिसका पता पटना और दूसरे जिलों में उनके समर्थन में लगे पोस्टर-बैनर, नारेबाजी और सोशल मीडिया अभियानों से भी चलता है. पटना के गोलम्बरों और चौराहों पर तो ‘नीतीश सेवक, मांगे निशांत’ जैसे बैनर भी लगाए गए और इनमें निशांत को जेडीयू का भविष्य और उत्तराधिकारी तक बताया गया.

धीरे-धीरे सक्रिय दिखने लगे निशांत कुमार

निशांत कुमार की आगामी सक्रिय भूमिका को लेकर बल तब और मिला जब पिछले साल बिहार चुनाव के नतीजों के बाद जब वह कुछ सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखे थे. नीतीश के शपथ ग्रहण समारोह में भी निशांत सबसे आगे की लाइन में कुर्सी पर बैठे थे.

जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी अपने दो बयानों से पार्टी कार्यकर्ताओं की ही मांग और भावनाओं की तस्दीक की. संजय झा ने कहा था कि जेडीयू कार्यकर्ता निशांत को पार्टी में चाहते हैं पर इस बारे में फैसला उन्हें ही करना है. लेकिन असल में ये फैसला नीतीश कुमार को करना है कि उनका उत्तराधिकारी कौन होगा. हालांकि नीतिश हमेशा से परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं.

पिछले साल 2025 के विधानसभा चुनाव में जब कुछ नेताओं ने निशांत कुमार को नालंदा सीट से चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा तो नीतीश ने साफ मना कर दिया था. पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने निशांत के राजनीतिक भविष्य को लेकर पार्टी नेताओं को कोई संकेत नहीं दिया है. ऐसे में उनको अगर निशांत को राजनीति में लाना होता या उत्तराधिकारी बनाना होता तो जरूर निशांत को उसके लिए ग्रूम करते, तैयार करते पर ऐसा नहीं दिख रहा है.

… वरना फूट से कोई नहीं रोक पाएगा

लेकिन पार्टी नेताओं के मुताबिक पहले की परिस्थिति और आज के हालात में अंतर है. अगर जेडीयू जैसे क्षेत्रिय दल को नीतीश को अपने बाद भी एकजुट बनाए रखना है तो परिवार से किसी को आगे लाना ही पड़ेगा नहीं तो नीतिश के बाद जेडीयू में फूट को कोई रोक नहीं सकता.

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पहले नीतीश कुमार ने आरसीपी सिंह को भी अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाना शुरू किया था पर आरसीपी उनकी उम्मीदों और भरोसे पर खरे नहीं उतरे. ऐसे में अगर परिवार से उनके बेटे निशांत को ही उनका उत्तराधिकारी बनाया जाता है तो पार्टी के कार्यकर्ता उसे स्वीकार करेंगे. पार्टी नेताओं का यह भी मानना है कि अब और देर करना सही नहीं है और कयास भी यही है कि नीतीश कुमार अपने मौजूदा कार्यकाल में ही अपने उत्तराधिकारी के बारे में फैसला कर सकते हैं.