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Thursday, January 8, 2026

बिहार में भिखारियों को मिलेंगे 10-10 हजार, क्या है सरकार की योजना?

बिहार में भिखारियों को मिलेंगे 10-10 हजार, क्या है सरकार की योजना?


बिहार सरकार लगातार जनता के ऊपर पैसों की बरसात कर रही है. अब नीतीश सरकार वैसे लोगों को पैसे दे रही है, जो सड़क किनारे भीख मांगकर अपना जीवन यापन कर रहे है. सरकार इन भिक्षुकों को चिंहित कर समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए समूह बनाकर 10-10 हजार की राशि बैंक खातों में डाल रही है.

जिससे वह छोटा रोजगार शुरू कर अपना जीवन यापन कर सकें.

सरकार वर्तमान में भीख मांगने की मजबूरी को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना चला रही है, जो पूर्णियां सहित राज्य के 10 जिलों में संचालित है. पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण में 19 पुनर्वास केंद्र समाज कल्याण विभाग की ओर से ये योजना संचालित की जा रही है.

खाना, कपड़ा और इलाज मुफ्त

राज्य के इन 10 जिलों में भिक्षुकों को खाना, कपड़ा, इलाज, कंसल्टेशन, योग और मनोरंजन जैसी सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त में दी जा रही हैं. इसके अलावा 14 अन्य जिलों में नए पुनर्वास गृह खोलने की प्रक्रिया चल रही है और भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम बनाए जा रहे हैं.

कैसे मिल रहा फायदा?

पूर्णियां में चल रहे सेवा कुटीर की उत्प्रेरक अफसाना खातून ने बताया कि सड़क किनारे भीख मांगने वाले को पहले चिन्हित किया जाता है. अगर कोई स्वास्थ्य है तो फिर उन्हें भिक्षावृत्ति के धंधे से दूर करने का प्रयास किया जाता है. उनका एक ग्रुप बनाकर पहले सामूहिक बचत के बारे में बताया जाता है फिर सरकार के द्वारा मिलने वाली पहली किस्त 10 हजार रुपए भिक्षावृत्ति छोड़ चुके लोगों को दिया जाता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूर्णियां में 10 ग्रुप सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जिसमें कुछ लोग चाय दुकान, अंडा दुकान, सब्जी बेचकर अपना जीवन यापन कर रहे है.

रोजाना की जाती है काउंसलिंग

सेवा कुटीर के अधीक्षक श्रवण कुमार ने बताया कि वर्तमान में इस केंद्र में 39 भिक्षुओं को रखा गया है, जिसमें ज्यादातर अपना घर बताने में असमर्थ है. रहने की व्यवस्था के साथ उनका इलाज भी किया जाता है. रोजाना उनकी काउंसलिंग की जाती है. अगर वह अपना नाम पता बता देते हैं तो उन्हें उनके परिवार से मिला दिया जाता है.

जोड़ा जाता है स्वरोजगार से

श्रवण कुमार ने बताया कि इसके अलावे जो अनाथ होते हैं, उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाता है. सरकार भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत जो राशि देती हैं. उन्हें देकर रोजगार से जोड़ दिया जाता है. इसके अलावा सेवा कुटीर में 2 उत्प्रेरक है, जो मंदिर, मस्जिद, बस स्टैंड रेलवे स्टेशन पर जाकर भिक्षुकों को रेस्क्यू करते है.

फिलहाल जो भी भिक्षु स्वरोजगार से जुड़ना चाहते हैं, उसके लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. सभी भिक्षुकों का आवेदन जिले के सामाजिक सुरक्षा कोषांग में जमा किया जा रहा है. जिसके बाद 10-10 हजार की राशि उनके खाते में भेजी जाएगी. यह योजना भीख मांगने वालों लोगों को इससे निकालकर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन देने के लिए बनाई गई है.