बिहार में जमीन विवाद से जुड़ी समस्याओं के तत्काल और प्रभावी समाधान के लिए सरकार ने एक अहम और जनहितकारी कदम उठाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्णय लिया है कि अब गांववालों को जमीन से संबंधित मामलों के लिए प्रखंड या अंचल कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
इसके बजाय राजस्व कर्मचारी सीधे पंचायत भवन में बैठकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे.
पंचायत में ही होगा समाधान
यह फैसला भूमि सुधार जन कल्याण संवाद योजना के तहत लिया गया है. योजना का उद्देश्य है कि गांव के स्तर पर ही जमीन से जुड़े विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, रसीद, सीमांकन और अन्य राजस्व मामलों का निपटारा किया जा सके. इसके तहत राजस्व कर्मचारी अब अंचल कार्यालय की बजाय अपनी-अपनी पंचायतों में निर्धारित दिनों पर उपस्थित रहेंगे.
रोस्टर के हिसाब से बैठेंगे कर्मचारी
जिन राजस्व कर्मचारियों के पास एक से अधिक पंचायतों का प्रभार है, वे रोस्टर के अनुसार अलग-अलग पंचायतों में बैठेंगे. किस दिन और किस समय राजस्व कर्मचारी पंचायत भवन में उपलब्ध रहेंगे, इसकी जानकारी पंचायत के नोटिस बोर्ड पर पहले से चस्पा की जाएगी ताकि आम लोगों को किसी तरह की असुविधा न हो.
भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश
इस व्यवस्था से ग्रामीणों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी. पहले जहां लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी ब्लॉक या अंचल कार्यालय जाना पड़ता था, वहीं अब पंचायत स्तर पर ही समाधान मिल सकेगा. इससे न केवल जमीन विवादों में कमी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा.
DCLR और CO करेंगे जांच
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी पुख्ता व्यवस्था की है. अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी (DCLR) और अंचलाधिकारी (CO) समय-समय पर पंचायतों में जाकर जांच और मॉनिटरिंग करेंगे, ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से लागू हो सके. कुल मिलाकर, यह फैसला बिहार के ग्रामीण इलाकों में जमीन से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है.