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Friday, November 1, 2024

KHAGARIA/अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के सलाहकार समिति की आहूत बैठक में लिए गए कई निर्णय


अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के सलाहकार समिति की आहूत बैठक में लिए गए कई निर्णय

ग्रामीण स्तर पर जागरुकता शिविर लगा कर लोगों को आध्यात्म से जोड़ें - पंo मुकेश मिश्रा (धनबाद)

आध्यात्मिक केन्द्र के कार्यकलापों की लोकप्रियता बढ़ाने हेतु ग्रामीण स्तर पर चलाएं सदस्यता अभियान -गुरु अलख (विंध्याचल)

ANA/S.K.Verma

खगड़िया। ज़िला मुख्यालय के विश्वनाथगंज मोहल्ला में स्थित मां तारा शक्तिपीठ मंदिर परिसर में अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केन्द्र के सलाहकार समिति के सदस्यों की एक विशेष बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता केन्द्र के संस्थापक डॉ अरविन्द वर्मा उर्फ़ महर्षि अरविन्द ने की। बैठक में उपस्थित धनबाद से पधारे पंo मुकेश मिश्रा ने कहा भाग दौड़ की जिन्दगी में एक मात्र आध्यात्म ही है जो इंसान को तनाव मुक्त कर सकता है। आधुनिक युग में लोग अपनी स्वार्थ सिद्धि हेतु अपने शरीर को मशीन से भी ज्यादा तेज बना दिए हैं। सिर्फ़ आर्थिक लाभ के लिए अपने पराए और रिश्तेदारों तक को भूल गए हैं। भाईचारा भी लगभग समाप्त हो गया है। पंo मुकेश मिश्रा ने आगे कहा आध्यात्म क्षेत्र में अधिक से अधिक लोग जुड़ें इसके लिए ग्रामीण स्तर पर जागरुकता शिविर लगा कर लोगों को जागरुक करने की आवश्यकता है। औरंगाबाद से पधारे पंo अलख निरंजन तिवारी ने कहा खगड़िया के लोग सौभाग्यशाली हैं कि यहां मां तारा शक्तिपीठ मंदिर में मां तारा की प्रतिमा स्थापित हुई है, जहां माता रानी का दर्शन और स्तुति करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है, माता रानी की कृपा बनी रहती है।आध्यात्मिक क्षेत्र में छल, कपट वर्जित है। अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के संस्थापक डॉ अरविन्द वर्मा उर्फ़ महर्षि अरविन्द ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा आज विरले ही सरकारी अधिकारी या सरकारी नेता हैं जो समाज को विकसित करने, दबे, कुचले और निरीह लोगों को आवश्यक सहयोग करने में दिलचस्पी लेते हैं। अधिकतर अधिकारी सिर्फ़ अपनी झोली भरने में ही समय लगा रहे हैं नतीजतन उन्हें नाना प्रकार की बीमारियों, विभागीय उच्चाधिकारियों की फटकार, आम जनता का कोप भाजन बनना पड़ता है। उनकी अमन, चैन और शांति धीरे धीरे खत्म होने लगती है। विंध्याचल (यूपी) के बाबा गुरु अलख जो अस्वस्थता के कारण बैठक में नहीं पहुंच सके पर दूरभाष पर अपनी अभिव्यक्ति से सदस्यों को अवगत कराए। गुरु अलख ने कहा घोर कलियुग चल रहा है। इस काल में इंसान को चिंतन, मनन के लिए कम से कम एक घंटा समय अवश्य निकलना चाहिए। इसे अपने दैनिक दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। आध्यात्म से जुड़ने वालों को चंद महीने में ही एहसास हो जायेगा कि उनमें क्या परिवर्तन हुआ ? गुरु अलख ने केन्द्र के क्रिया कलापों को अत्यधिक लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से सदस्यता अभियान चला कर सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर बल दिया।