Kosilive Saharsa
एक शराब तस्करी का भाई होना एक अधेड़ को काफी महंगा पड़ गया। वर्दी वाले ने कानून को अपने हाथ में लिया और शराब तस्करी में जेल में बंद मंगुआर निवासी प्रमोद यादव के भाई वकील यादव को पुलिस ने घर से उठाया और सुनसान जगह पर ले जाकर पिटाई की और अधमरा कर सुनसान जगह पर ही छोड़ दिया। इस कारण वह सदर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसके शरीर की कई हड्डियां टूट गई। शरीर पर लाठियों की पिटाई के सैकड़ों जगह काले जख्म उभरे हैं। जबकि वकील यादव का उसके भाई से अच्छे रिश्ते नहीं हैं। बसनही पुलिस का यह कारनामा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अपराध के मामले में पकड़े गए किसी भी आरोपी का भाई होना जुर्म है। पुलिस ने उसकी पिटाई क्यों की, अब बसनही थानाध्यक्ष के पास इसका माकूल जबाब नहीं है।
सदर अस्पताल में इलाजरत जख्मी वकील यादव ने बताया कि 20 जून की रात्रि वह खाना खाकर घर में सो गया। पत्नी सब छत पर सोई थी। रात के लगभग 12 बजे बसनही थानाध्यक्ष अविनाश सिंह, थाना के छोटा बाबू और तीन गाड़ी भरकर पहुंचा कमांडो उसके घर पर आया और उसे घर से उठा अपने साथ लेकर जाने लगा। पूछने पर थानाध्यक्ष ने कहा कि कुछ बात है। इस पर मैंने कहा कि पत्नी को बता देते हैं तो मना कर दिया और अपने साथ गांव के ही विषहरी स्थान के पास ले गया, जहां रस्सी से हाथ पैर बांध कर उसके शरीर पर लाठियां बरसाने लगे। गलती पूछने पर कहा कि भाई प्रमोद यादव का शराब कहां है बताओ। उसने कहा कि वह उससे 20 साल से अलग रह रहा है।
उसकी कोई जानकारी नहीं है। जिस पर थानाध्यक्ष डंडा, रॉड से तब तक पीटता रहा, जब तक वह अधमरा नहीं हो गया। जब थानाध्यक्ष पीटते थक जाते तो छोटा बाबू और कमांडो को मारने के लिए बोला जाता। सभी ने खूब मारा। उसके बाद पूछा कि प्रमोद का केला बागान कहां है, जिस पर वकील यादव ने दिखाने की बात कही तो फिर गाड़ी से बागान ले जाया गया। जहां शराब नहीं मिली तो फिर पूछा उसकी शराब जो आयी है, वह कहां है? जानकारी नहीं देने पर फिर मारकर बेसुध कर दिया। इसके बाद सभी गाड़ी में लेकर सड़क किनारे फेंक कर चला गया।