Kosilive Saharsa:
सहरसा के पतरघट में दो बहनों की एक साथ मौत हो गई। उम्र के लंबे पड़ाव तक जिंदगी जीने वाली दोनों बहनों के लिए यह महज संयोग ही कहें या फिर भगवान का लिखा मानें कि न सिर्फ दोनों बहनों ने साथ दम तोड़ा, बल्कि दोनों वैवाहिक बंधन में भी एक साथ बंधी थी। जिंदगी के सफर को यूं साथ छोड़कर एक साथ दोनों का चला जाना गांवभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला पतरघट के धबौली दक्षिणी के कृष्ण बंगला का बताया जा रहा है।
दरअसल, दोनों आपस में चचेरी बहनें हैं। इनमें से एक 96 वर्षीय मनोरमा देवी तो दूसरी बड़ी बहन 100 वर्षीय रामपरी देवी बताई जा रही हैं। मनोरमा देवी के पुत्र पंकज कुमार पप्पू ने बताया कि लंबी उम्र के कारण उनकी मां बीमार चल रहीं थीं। आखिरकार शनिवार की सुबह 6.25 में उनकी मौत हो गई। वहीं रामपरी देवी के पुत्र निर्मल कुमार ने बताया कि उनकी छोटी मां यानी मनोरमा देवी के निधन के बाद उनकी मां की सांसें भी धीमी हो गईं और 9.45 बजे उनका भी निधन हो गया।
दोनों बहनों के एक ही दिन कुछ घंटों के अंतराल में मौत की घटना लोगों में चर्चा का विषय बन गया। गांव वालों और परिजनों के मुताबिक दोनों चचेरी बहनों की शादी धबौली के एक ही परिवार के दो चचेरे भाइयों के साथ एक ही दिन एक ही समय पर हुई थी। मनोरमा देवी की शादी योगेंद्र नारायण सिंह और रामपरी देवी की शादी शिवदर्शन सिंह से हुई थी। हालांकि दोनों के पति भी पहले ही इस दुनिया से चल बसे। शादी करीब 90 साल पूर्व होने की बात कही जाती है। हालांकि शादी की स्पष्ट तिथि घर के किसी सदस्यों को मालूम नहीं है। दोनों अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ कर गई है।
गांव के बगीचे में दोनों का हुआ अंतिम संस्कार
गांव वालों की मानें तो दोनों बहनों की जहां इस गांव में एक साथ डोली आई थी। अब वापस इसी गांव से दोनों बहनों की एक साथ अर्थी भी उठ रही है। दोनों की मौत के बाद घर से अर्थी पांच मिनट के अंतराल पर निकाली गई और घर से दूर जाने के बाद दोनों एक साथ हो गई। दोनों का अंतिम संस्कार गांव के ही बगीचे में विधि विधान के साथ किया गया। मनोरमा देवी को उनके पुत्र पंकज कुमार पप्पू और रामपरी देवी को उनके पुत्र निर्मल कुमार ने मुखाग्नि दी है।