कोशी लाइव/न्यूज डेस्क:
पटना:बिहार के यूट्यूबर मनीष कश्यपको बड़ा झटका लगा है. उनके खिलाफ तमिलनाडु सरकार के एनएसए लगाने के फैसले को राज्यपाल रवींद्र नारायण रवि ने मंजूरी दे दी है. जिसके बाद अब उनको पूरे एक साल तक जेल में ही बिताना होगा. जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक इस बारे में राजभवन से अधिसूचना भी जारी कर दी गई है. इस नोटिफिकेशन के अनुसार 12 महीने के लिए मनीष राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जेल में ही रहेंगे.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?:पूर्व आईपीएस अमिताभ कुमार दास कहते हैं कि आमतौर पर पुलिस को किसी आरोपी के खिलाफ 90 दिनों के भीतर चार्ज शीट दाखिल करनी होती है लेकिन जिसके खिलाफ एनएसए लग जाता है, उस मामले में पुलिस को 1 साल की अवधि मिल जाती है. उस दौरान पुलिस चार्जशीट दाखिल कर सकती है. आरोपी को सीआरपीसी की धारा 167 का लाभ एनएसए के मामले में नहीं मिल पाता है.
मनीष कश्यप को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत:मनीष कश्यप ने रासुका हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए 8 मई को सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने सुनवाई करते हुए उनको राहत देने से इंकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि अगर आपको राहत चाहिए तो संबंधित हाईकोर्ट जाएं.
मनीष को सर्वोच्च न्यायालय की फटकार: सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा था, "तमिलनाडु एक स्थिर राज्य है. आप अशांति फैलाने के लिए कुछ भी प्रसारित कर रहे हैं. हम आपकी याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं. अगर आपको किसी प्रकार की राहत चाहिए तो आप संबंधित हाईकोर्ट के पास जा सकते हैं."
क्या है पूरा मामला?:दरअसल मार्च महीने में तमिलनाडु में बिहार के प्रवासी श्रमिकों के साथ मारपीट का दावा करते हुए कई वीडियो मनीष कश्यप के यूट्यूब चैनल और ट्विटर हैंडल से पोस्ट किए गए थे. इसी को लेकर उनके खिलाफ बिहार और तमिलनाडु में कई केस दर्ज हुए. मनीष ने बाद में 18 मार्च को पश्चिम चंपारण जिले के जगदीशपुर ओपी में सरेंडर कर दिया था. पहले बिहार की आर्थिक अपराध इकाई ने उनके कई दिनों तक पूछताछ की, फिर मदुरै पुलिस उन्हें अपने साथ तमिलनाडु ले आई. 12 अप्रैल को मनीष पर रासुका लगा दिया गया