Kosi Live-कोशी लाइव BREAKING/आनंद मोहन की रिहाई पर बिहार सरकार को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में मांगा जवाब; रिहाई का रिकॉर्ड देने .. - Kosi Live-कोशी लाइव

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Monday, May 8, 2023

BREAKING/आनंद मोहन की रिहाई पर बिहार सरकार को नोटिस: सुप्रीम कोर्ट ने 2 हफ्ते में मांगा जवाब; रिहाई का रिकॉर्ड देने ..

बिहार के बाहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस जारी कर रिहाई पर जवाब मांगा है। 2 हफ्ते में इस पर जवाब देने को कहा। बिहार सरकार से रिहाई से जुड़ा रिकॉर्ड देने को भी कहा है।

DM जी कृष्णैया की हत्या में दोषी आनंद मोहन को 27 अप्रैल को रिहा कर दिया गया था। 29 अप्रैल को DM जी कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने इस रिहाई को चुनौती दी थी। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में आनंद मोहन को फिर से जेल भेजने की मांग की गई है।

बिहार सरकार ने जेल मैनुअल में बदलाव किया था, इसके बाद आनंद मोहन सिंह गुरुवार (27 अप्रैल) सुबह 6ः15 बजे सहरसा जेल से रिहा हुए थे।

पत्नी ने कहा था- हमारे साथ न्याय जरूर होगा

सुप्रीम कोर्ट में याचिका स्वीकार होने पर डीएम जी कृष्णैया की पत्नी ने कहा कि ये अच्छा संकेत है। मुझे न्यायालय पर भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट हमारे साथ जरूर न्याय करेगा। सुप्रीम कोर्ट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके फैसले को वापस लेने का निर्देश देगा।

जिस दिन आनंद मोहन की रिहाई हुई थी, उस दिन उमा कृष्णैया ने कहा था कि ये वोट बैंक की राजनीति है। बिहार सरकार ने राजपूत वोटों के लिए आनंद मोहन की रिहाई की है।

आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट में PIL

आनंद मोहन की रिहाई के खिलाफ दलित संगठन से जुड़े अमर ज्योति ने भी 26 अप्रैल को पटना हाईकोर्ट में PIL दायर की। कारागार अधिनियम 2012 को संशोधित कर सरकार ने जो अधिपत्र निकाला है। उसके खिलाफ याचिका दायर की गई है। अमर ज्योति (30) भोजपुर के पीरो के रहने वाले हैं। उन्होंने कोर्ट से सरकार की ओर से जारी उस अधिपत्र को निरस्त करने की अपील की है।

अब जानिए किस तरह से आनंद मोहन बाहर आए

आनंद को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके तहत उन्हें 14 साल की सजा हुई थी। आनंद ने सजा पूरी कर ली थी, लेकिन मैनुअल के मुताबिक, सरकारी कर्मचारी की हत्या के मामले में दोषी को मरने तक जेल में ही रहना पड़ता है। नीतीश सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया। इसका संकेत जनवरी में नीतीश कुमार ने एक पार्टी इवेंट में मंच से दिया था कि वो आनंद मोहन को बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं। 10 अप्रैल को राज्य सरकार ने इस मैनुअल में बदलाव कर दिया।

नियम था: 26 मई 2016 को जेल मैनुअल के नियम 481(i) (क) में कई अपवाद जुड़े, जिसमें काम पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या जैसे जघन्य मामलों में आजीवन कारावास भी था। नियम के मुताबिक ऐसे मामले में सजा पाए कैदी की रिहाई नहीं होगी और वह सारी उम्र जेल में ही रहेगा।
बदलाव किया: 10 अप्रैल 2023 को जेल मैनुअल से ‘काम पर तैनात सरकारी सेवक की हत्या’ अंश को हटा दिया गया। इसी से आनंद मोहन या उनके जैसे अन्य कैदियों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ।