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अभियान बसेरा के तहत पूरे राज्य में वासभूमि रहित परिवारों को दिसंबर माह तक जमीन उपलब्ध कराने का लक्ष्य विभाग के समक्ष है। इसके लिए सभी अपर समाहर्ताओं को अगले 15 दिनों में जिलावार सूची तैयार करने का निदेष दिया गया है।
इस सूची में पूर्व के सर्वे के बाद बचे हुए लोगों के नाम दर्ज रहेंगे ताकि जरूरतमंदों की सूची बनाने और उन्हें वास भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल करने में सहूलियत हो।
ताजा जानकारी के मुताबिक सूबे में भूमिहीन परिवारों की संख्या 21597 है। ये बात अपर समाहर्ताओं की राज्य स्तरीय बैठक में सोमवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव ब्रजेष मेहरोत्रा ने कही। शास्त्रीनगर के सर्वे सभागार में हुई इस बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह के अलावे निदेषक भू अर्जन सुषाील कुमार और सभी संयुक्त सचिव के अलावा सभी 38 जिलों के अपर समाहर्ता मौजूद थे।
इसके अलावा छूटे हुए परिवारों का ताजा सर्वे करने के लिए मोबाइल एप की मदद ली जा रही है। दोनों प्रकार से जिन वास भूमिहीन परिवारों का पता लगेगा उन्हें 5 डिसमिल तक वास की भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। ये भूमि यथासंभव भूमिहीन लोगों के गांव में या फिर उसके बिल्कुल पास के गांव में दिया जाएगा। कोषिष की जाएगी कि भूमिहीन लोगों को समूह में बसाया जाए और सड़क, बिजली, पानी जैसी सामूहिक सुविधाओं का इंतजाम सरकार की तरफ से किया जाए। राजस्व एवं भूमि सुधार के मंत्री आलोक कुमार मेहता ने कहा कि बंटवारे से या फिर परिवार बढ़ने से जो परिवार वास भूमि विहीन हो गए हैं उन्हें घर बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ने दाखिल-खारिज के लंबित मामलों की विस्तार से जिलावार समीक्षा की। उन्होंने सभी अपर समाहर्ताओं को अपने जिले के अंचलों की जूम पर साप्ताहिक बैठक करने का निदेष दिया ताकि लंबित मामलों की संख्या में कमी आए। हालांकि उन्होंने इस बात पर संतोष जाहिर किया कि पिछले 3 महीनों में दाखिल-खारिज के लंबित मामलों की संख्या 10.30 लाख से घटकर 8.12 लाख हो गई है। उन्होंने 30 जून तक लंबित मामलों की संख्या शून्य करने का निदेष सभी अपर समाहर्ताओं को दिया। इस वित्तीय वर्ष 2023-24 में पारू अंचल में अबतक मात्र 2.39 फीसदी म्युटेषन केस को निपटाने को लेकर उन्होंने मुजफफरपुर के अपर समाहर्ता से पृछा की। इसी तरह के भोजपुर के संदेष, और जहानाबाद के घोसी अंचल में भी इस वित्तीय वर्ष में दाखिल खारिज के निष्पादन की गति बेहद कम पाई गई।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि अगले 2 माह में राज्य के सभी राजस्व कर्मचारियों को लैपटॉप उपलब्ध करा दिया जाएगा। इससे लंबित वादों की संख्या को कम करने में सहूलियत होगी। कई जिलों से यह शिकायत भी मिली कि सीओ या फिर आरओ के छुटटी पर जाने के कारण उनके हिस्से का काम लंबित हो जाता है। इस पर अपर मुख्य सचिव ने कहा कि दोनों पदों में एक पर भी अगर कोई अधिकारी है तो वो अवकाष पर गए अधिकारी का कार्य भी देखेगा।
दाखिल खारिज की जिलावार समीक्षा में बिना किसी वाजिब कारण के लंबित मामलों की संख्या सर्वाधिक पटना जिले में पाई गई। बगैर किसी कारण के 19.05.23 तक पटना जिले में दाखिल खारिज के 10094 मामले लंबित पाए गए। 4517 संख्या के साथ रोहतास दूसरे स्थान पर जबकि 4281 के साथ मुजफफरपुर जिला तीसरे स्थान पर था। जबकि सबसे कम 486 लंबित मामले लखीसराय में था जबकि 582 मामले के साथ बांका जिला दूसरे स्थान पर था। पटना जिले के 10094 लंबित मामले में सबसे अधिक आरओ स्तर पर 3080, आम सूचना-खास सूचना के स्तर पर 1022, क्लर्क के स्तर पर 617 और अंचल अधिकारी के स्तर पर 5375 मामले लंबित पाए गए।
अतिक्रमण के मामले की जिलावार समीक्षा में पाया गया कि पूरे राज्य में कुल 6972 अतिक्रमण के मामले विभाग के संज्ञान में है जिसमें से 4556 मामले का निष्पादन कर दिया गया है। इसके लिए कुल 4316 अतिक्रमणों को हटाया गया है। किन्तु अभी भी 2416 मामले लंबित है। इसमें सर्वाधिक 315 मामले नालंदा जिले से संबंधित हैं। अपर मुख्य सचिव ने अतिक्रमण के मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने का निदेष दिया।