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सरकार ने गरीब बच्चों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के उद्देश्य से मध्याह्न भोजन योजना यानी मिड डे मिल शुरू की थी। मगर सरकार की इस योजना में सरकारी शिक्षक ही भ्रष्टाचार कर रहे हैं। जिले के दो सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल ने स्कूल में पढ़ने वाले करीब 600 बच्चों का एमडीएम के साथ घपला कर दिया। बायसी ब्लॉक के दो स्कूलों के प्रिंसिपल ने स्कूल बंद रहने के बाद भी 600 बच्चों को भोजन करा दिया। यही नहीं बकायदा इसका हिसाब भी दिया गया। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्कूलों का औचक निरीक्षण करने पहुंचे।
प्रोग्राम ऑफिस को जांच में बंद मिले दोनों स्कूल
बायसी में प्रधानाध्यपक द्वारा गलत एमडीएम का डेटा देने का मामला एक माह पुराना है। गत 25 मार्च को कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रोग्राम ऑफिसर) पीएम पोषण योजना बायसी में स्कूलों के औचक निरीक्षण पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान प्रोग्राम ऑफिसर ने मध्य विद्यालय मंडेल कदवा टोला और प्राथमिक विद्यालय सीरनियां में गड़बड़ी पाई।
डीईओ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग।
प्रोग्राम ऑफिस ने इस मामले में डीईओ को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बताया है कि 25 मार्च की दोपहर 12:45 बजे वे मध्य विद्यालय मंडेल कदवा टोला पहुंचे जहां उन्हें स्कूल बंद मिला और स्कूल के प्रांगण में उन्हें एक भी शिक्षक नहीं मिले। इसके बाद वे 1:15 बजे प्राथमिक विद्यालय सीरनियां पहुंचे। यहां भी उन्होंने स्कूल बंद पाया। इसके बाद उन्होंने जब विद्यालय प्रधान से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि स्कूल 11 बजे ही बंद कर दिया गया था। ऐसे में पूर्वाह्न में स्कूल बंद होने के बाद भी प्रिंसिपल ने आईवीआरएस के पोर्टल पर 25 मार्च की तारीख में एमडीएम का संचालन दर्शाया है।
ग्रामीणों व बच्चों ने बताया स्कूल में नहीं बनता है एमडीएम
सीरनियां स्थित प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण करने पहुंचे कार्यक्रम पदाधिकारी को वहां मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल में बच्चों को एमडीएम नहीं दिया जाता और न ही विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए भोजन ही पकाया जाता है। ग्रामीणों की शिकायत पर कार्यक्रम पदाधिकारी ने डीईओ को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग दोनों प्रिंसिपल से लिखित में जवाब मांगने की तैयारी कर रहा है।