मधेपुरा। स्वास्थ्य संकट से निजात के लिए तमाम बातें गलत साबित हो रही हैं। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी व संसाधन के अभाव में दम तोड़ रही है जांच व्यवस्था।
सदर अस्पताल परिसर में वर्ष 2014 में स्थापित 12 बेड का एसएनसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष) का संचालन छह साल बीतने के बाद भी अब तक सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। शिशु रोग चिकित्सक का यहां पदस्थापन ही नहीं हो पाया है। ऐसे में नवजात का इलाज पर संकट है। सदर अस्पताल में पदस्थापित एक मात्र शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक ही अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी व नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष को संभाल रहे हैं। इससे बच्चों के इलाज में दिक्कत होती है। जहां 24 घंटे चिकित्सक उपलब्ध रहना चाहिए वहां मात्र एक घंटा ही चिकित्सक रहते हैं। बीमार नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। खराब हो रहे हैं उपकरण एसएनसीयू के अंदर कई आवश्यक उपकरण भी खराब हो रहे हैं। नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष का निर्माण होने के बाद कई उपकरण लगाए गए थे, लेकिन, विशेषज्ञ के अभाव में बेकार हो रहे हैं। इलाज के लिए 13 ऑक्सीजन कंसेंटेर में से नौ खराब हो गए हैं। इसी प्रकार आठ इंफ्यूजन पंप में से छह पंप खराब हैं। एसएनसीयू के अंदर एक भी वेंटीलेटर उपलब्ध नहीं रहने के कारण गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बाहर रेफर करना मजबूरी बन गया है। आठ चिकित्सक के पद हैं स्वीकृत स्वास्थ्य विभाग ने एसएनसीयू के लिए आठ शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के पद स्वीकृत किए हैं, लेकिन आज तक एक भी चिकित्सक का पदस्थापना नहीं किया है। नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष को अस्पताल प्रशासन पिछले छह साल से अस्पताल के चिकित्सक के भरोसे किसी प्रकार संचालित कर रहा है। वर्तमान समय में सदर अस्पताल में मात्र एक शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित हैं। वह ही समय निकालकर शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती बीमार नवजात का इलाज करते हैं। कोट शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की
कमी को लेकर विभाग को पत्र लिखा गया था। विभाग ने खाली पद की जानकारी मांगी थी। शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के खाली पद की सूची तैयार कर विभाग को भेजा गया है। एसएनसीयू का खराब ऑक्सीजन कंसेंटेटर, इंफ्यूजन पंप को बदलने को लेकर आपूर्तिकर्ता को बुलाया गया है।
-डॉ. डीपी गुप्ता, शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक सह अस्पताल उपाधीक्षक
सदर अस्पताल,मधेपुरा