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बेगूसराय में दो मासूम बहनें लावारिस हालत में मिलीं, मामा ट्रेन में बैठाकर बोला- जहां जाना है चली जाओ
बेगूसराय। पिता की मौत और मां के दूसरी शादी कर घर छोड़ देने के बाद दो मासूम बहनों की जिंदगी पहले से ही कठिनाइयों से घिरी थी। इसी बीच उनकी जिंदगी में एक और दर्दनाक मोड़ तब आया, जब उनके सगे मामा ने उन्हें ट्रेन में बैठाकर यह कह दिया कि जहां जाना है चली जाओ।
दोनों बच्चियां ट्रेन से बेगूसराय जिले के लखमिनिया रेलवे स्टेशन पहुंच गईं, जहां संदिग्ध अवस्था में अकेले घूमते देख आरपीएफ ने उन्हें सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। दोनों बच्चियों की उम्र करीब 10 वर्ष और 7 वर्ष बताई जा रही है। प्राथमिक पूछताछ के बाद रेल पुलिस ने उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द कर दिया है।
ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत बचाई गईं बच्चियां
आरपीएफ पोस्ट लखमिनिया के प्रभारी सह निरीक्षक अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन परिसर में गश्त के दौरान दोनों बच्चियां अकेले और असहाय अवस्था में घूमती मिलीं। पूछताछ में उनके जवाब संदिग्ध होने के साथ बेहद भावुक करने वाले थे। इसके बाद ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत दोनों को संरक्षण में लेकर आवश्यक कार्रवाई की गई।
पिता की मौत, मां ने की दूसरी शादी
पूछताछ में बच्चियों ने बताया कि वे भागलपुर जिले के जगदीशपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। इसके बाद दोनों अपनी मां के साथ ननिहाल में रह रही थीं। कुछ दिन पहले उनकी मां ने भी दूसरी शादी कर घर छोड़ दिया। मां के जाने के बाद दोनों बच्चियां अपने मामा के पास रह रही थीं।
‘जहां जाना है चली जाओ’ कहकर ट्रेन में बैठाया
बच्चियों के अनुसार, बुधवार को उनके मामा ने एक झोले में कुछ कपड़े रखकर दोनों को ट्रेन में बैठा दिया। ट्रेन खुलने से पहले उन्होंने सिर्फ इतना कहा— “जहां जाना है चली जाओ।”
इसके बाद दोनों बच्चियां अकेले सफर करती हुई लखमिनिया स्टेशन पहुंच गईं। वहां उतरने के बाद वे काफी देर तक प्लेटफॉर्म और स्टेशन परिसर में भटकती रहीं।
पूछताछ के दौरान बच्चियों ने अपनी मां का मोबाइल नंबर भी बताया। आरपीएफ ने उस नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। अन्य परिजनों से भी तत्काल संपर्क नहीं हो सका।
बाल कल्याण समिति कर रही आगे की कार्रवाई
रेल पुलिस ने दोनों बच्चियों को जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया है। समिति की ओर से बच्चियों की काउंसलिंग की जा रही है और उनके सुरक्षित आवासन की व्यवस्था की जा रही है।
आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि यदि बच्चियों के परिजनों का पता नहीं चलता है या कोई कानूनी पहलू सामने आता है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों बच्चियां सुरक्षित हैं और उनकी देखभाल बाल कल्याण समिति की निगरानी में की जा रही है।