सहरसा। एक तरफ छोटी-बड़ी नदियों पर सरकार द्वारा पुल निर्माण कर दो शहरों और एक गांव से दूसरे गांवों को जोड़ा जा रहा है, किंतु 1984 से आजतक पूर्वी कोसी तटबंध के शहीद चौक से जानेवाली सड़क के पश्चिम तिलाठी और पूरब गोपालपुर के बीच धेमरा नदी पर पुल का निर्माण नहीं होने से लोगों के लिए नाव ही एकमात्र आवागमन का सहारा है।
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वर्षों बाद बनकर तैयार पुल पर आवागमन नहीं हुआ चालू
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इस पुल का निर्माण जनता के संघर्ष के बाद ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सिमरी बख्तियारपुर की देखरेख में किया जा रहा है। इस पुल का शिलान्यास 11 फरवरी, 2014 को किया गया था। तीन करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से इस पुल का निर्माण समय सीमा बीत जाने के कई साल बाद हुआ। दोनों तरफ एप्रोच पथ नहीं बनने से आज भी सिर्फ पुल का ढांचा दिखाई पड़ता है।
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क्या कहते हैं दोनों गांव के ग्रामीण
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सेवानिवृत्त शिक्षक लक्ष्मीधर तांती, ग्रामीण चिकित्सक धीरेंद्र शर्मा, वार्ड सदस्य रंजीत शर्मा, बसंत शर्मा, पूर्व सरपंच रामदास तांती, रामप्रसाद शर्मा, नारायण तांती, मोहम्मद ताहिर हुसैन इत्यादि कहते हैं कि आज तक पुल से पार होना ग्रामीणों के लिए सपना ही है। लोग कहते हैं, क्या यही है विकास। 36 सालों से नाव पर सवार होकर इस गांव से दूसरे गांव जाना पड़ता है। खैर, पुल तो बनकर तैयार है लेकिन एप्रोच पथ नहीं बनने के कारण आज भी इसपर आवागमन चालू नहीं हो सका।
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कई गांव को जोड़ता है यह पुल
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यदि इस पुल के दोनों तरफ पहुंच पथ बन जाता है तो आवागमन शुरू हो जाएगा, जिससे राजनपुर, तिलाठी, घोघसम, गोपालपुर, मंझवा, बघवा, पहाड़पुर गांवों के ग्रामीण आसानी से गोपालपुर भाया चपराम कोठी होते हुए सहरसा एवं सिमरी बख्तियारपुर आना-जाना कर सकेंगे।
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क्या कहते हैं अधिकारी
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ग्रामीण कार्य विभाग कार्य प्रमंडल सहरसा के अधीक्षण अभियंता खलीकुज्जमा से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एप्रोच पथ में जमीन का प्रॉब्लम नहीं है तो एप्रोच पथ संवेदक को शीघ्र बनाना चाहिए। इसमें लेटलतीफी है तो मैं शीघ्र एक माह के अंदर बनाकर आवागमन चालू करवा दूंगा।