Kosi Live-कोशी लाइव स्पेशल रिपोर्ट/बिहार:क्या शराबबंदी का फैसला युवाओं को कर रहा है बर्बाद, क्योंकि शराबबंदी के बाद बिहार के लोगों में बढ़ी ड्रग्स की लत। - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Wednesday, September 30, 2020

स्पेशल रिपोर्ट/बिहार:क्या शराबबंदी का फैसला युवाओं को कर रहा है बर्बाद, क्योंकि शराबबंदी के बाद बिहार के लोगों में बढ़ी ड्रग्स की लत।

@स्टालिन अमर अक्की की स्पेशल रिपोर्ट:✍️

पटना. बिहार राज्य इन दिनों विधानसभा चुनाव (Assembly Election) को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है. अक्टूबर-नवंबर में बिहार में चुनाव प्रस्तावित हैं. साथ ही राज्य हाल ही में आईआईटी-जेईई (IIT-JEE) और एम्स (AIIMS) प्रवेश परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थियों के चलते चर्चा में बना हुआ है. बिहार शैक्षिक तौर पर हमेशा इतिहास गढ़ता रहा है लेकिन राज्य की गलियों में पनप रहे ड्रग्स (Drugs) के अड्डे उसे गर्त की ओर धकेल रहे हैं. हालांकि राज्य में शराबबंदी (Liquor Prohibition) का बड़ा फैसला लिया गया था लेकिन सरकार (Government) की नाक के नीचे ड्रग्स के गंदे खेल का बड़ा नेटवर्क फैला हुआ है.
आइए एक नजर डालते हैं राज्य में फैल रहे ड्रग्स के जाल पर.

राज्य की हर गली के कोने पर नशेड़ियों का एक अड्डा मौजूद है. इनमें से एक सत्यम सिंह हैं जो अपने दोस्त के प्रभाव में कम उम्र में ही नशे की लत (alcohol addiction) में डूब गए थे. समस्तीपुर (Samastipur) के सत्यम सिंह ने बताया कि राज्य में शराब पर प्रतिबंध (Alcohol Ban) लगने के बाद वह बहुत परेशान हो गए थे. कईयों का मानना है कि सूबे (State) में शराब पर प्रतिबंध लगने के बाद से लोगों को ड्रग्स की लत घर कर गई. बता दें कि बिहार के मुख्यमंत्री (Bihar CM) ने साल 2015 में अपने ऐलान में कहा था कि राज्य में शराबबंदी से घरेलू हिंसा (Domestic Violence) में कमी आएगी. उस वक्त सीएम के इस कदम को महिला वोटों के साथ जोड़कर देखा गया था.

शराबबंदी कानून का उल्लंघन कर बेचने वालों के खिलाफ मौत की सजा का ऐलानवहीं, साल 2016 में बिहार आबकारी (संशोधन) विधेयक 2016 के तहत शराबबंदी कानून का उल्लंघन कर बेचने वालों के खिलाफ मौत की सजा का ऐलान किया गया था, लेकिन शराबबंदी के बाद से लोगों ने नशे के नए तरीकों को अपनाना शुरू कर दिया था. सरकार की लापरवाही के चलते राज्य में ड्रग्स के धंधे का चलन बढ़ गया. राज्य में नशामुक्ति केंद्र (rehabilitation center) के आंकड़े बताते हैं कि 2018-19 में 4,876 लोगों का यहां इलाज चल रहा था जिसमें से अधिकांश ड्रग्स के आदी थे.

वहीं, मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (Narcotics Control Bureau) के अनुसार राज्य में नशेड़ियों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है. एनसीबी ने बताया कि साल 2015 में यह संख्या न के बराबर थी लेकिन शराबबंदी के बाद इन आंकड़ों में तेजी से उछाल आया. साल 2015 में एनसीबी ने राज्य से 14 किलो गांजा बरामद किया था तो वहीं साल 2017 में 28, 887 किलो गांजा की बड़ी खेप पर धावा बोला था. इसके अलावा साल 2015 में ही एनसीबी के हाथ सिर्फ दो किलो अफीम लगा था जो कि साल 2017 में 328 किलो तक पहुंच गया. शराबबंदी से पहले राज्य में पोस्ता (Poppy) का भी हाल खस्ता ही था लेकिन साल 2017 में एनसीबी ने 557 किलो पोस्ता बरामद किया था.

'नशामुक्ति केंद्र में आने वालों में 16 से 25 की उम्र के लोग, जो कि बड़ा चिंता का विषय'
ड्रग्स (Drugs) का सेवन करने वाले एक शख्स के मुताबिक, राजधानी पटना में गांजा का एक पैकेट मात्र 50 रुपये में बिकता है, लेकिन गुणवत्ता के आधार पर इसकी कीमत 300 रुपये तक की है. चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन सबके अलावा भी और ज्यादा दामों में बढ़िया क्वालिटी में नशीले पदार्थ 'मलाना क्रीम' (Malana cream) का भी सेवन किया जाता है. शख्स ने आगे बताया कि राजधानी के नया तोला, बीएमपी और खगौल क्षेत्र के हर नुक्कड़ पर ड्रग्स पेडलर आसानी से देखने को मिल जाएंगे. पटना के यह तीनों वो क्षेत्र हैं जिनका बीते एक दशक में तेजी से शहरीकरण हुआ है.

नशामुक्ति केंद्र की स्टाफ राखी शर्मा ने बताया 'नशामुक्ति केंद्र में आने वालों में 16 से 25 की उम्र के लोग हैं जो कि बड़ा चिंता का विषय है. केंद्र द्वारा जुटाए गए डेटा के आधार पर उन्होंने बताया कि साल 2014-15 में शराबबंदी से पहले आए 2,217 मरीज शराब के आदी थे, वहीं साल 2018-19 में इनकी संख्या घटकर 1,130 हो गई. इसके विपरीत साल 2015 में नशामुक्ति केंद्र में भर्ती होने वाले गांजा, चरस और भांग के मरीजो का आंकड़ा 1,459 था जो कि 2018-19 में 2,276 हो गया. उन्होंने आगे कहा कि केंद्र की स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी हैं क्योंकि उनके पास और मरीज रखने के लिए जगह कम पड़ रही है, क्योंकि पुराने मरीजों के परिजन उन्हें घर ले जाने से घबरा रहे हैं.

बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थ (NDPS) के तहत 2,583 केस फाइल हुए हैं. एडीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि 1985 के अधिनियम के तहत साल 2015 से 2020 तक ढाई हजार लोग अब तक गिरफ्तार किए जा चुके हैं. पुलिस ने बताया कि पश्चिमी चंपारण में अतुल कुमार गिरि नामक व्यक्ति बढ़िया गुणवत्ता का गांजा बेचने के लिए मशहूर है. बता दें कि पश्चिमी चंपारण भारत के उन व्यापार मार्गों में से एक है जहां से नेपाल से ड्रग्स की खेप का आयात होता है. गिरी ने बताया कि उन्हें रोजाना लगभग एक हजार ग्राहक मिलते हैं, जिन्हें वे लगभग 50 किलोग्राम गांजा बेचते हैं.