सुपौल। कहने वाले ने ऐसे ही नहीं कह दिया है कि नारी ममता, त्याग और बलिदान की मूरत होती है। जब-जब समय आया नारी अपने इन रूपों की झलक दिखाती रही है। समाज में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। हाल में मरौना प्रखंड की सरोजा बेला पंचायत के बेलहा गांव की सांझा देवी ने बलिदान का जैसा उदाहरण पेश किया उसने लोगों को झकझोर कर रख दिया। नाव पलटने के कारण तिलयुगा नदी में डूब रहे दो बच्ची को बचाने में खुद डूब गई लेकिन दोनों को बचा लिया। सांझा के बलिदान की यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। जिन दो बच्चियों को बचाने में सांझा की जान गई उनके माता-पिता सिर्फ सांझा की ही चर्चा करते रहते हैं।
घास लाने गई थी सांझा
सांझा घास लाने के लिए गई थी। खेत तिलयुगा नदी के उस पार है। साथ में कई महिलाएं और बच्चे भी थे। सभी नाव से नदी पार कर रहे थे। नदी पार करने के क्रम में नाव पलट गई। सभी अपनी जान बचाने की जुगत में जुट गई। जैसे-तैसे नदी पार किया। इसी क्रम में सांझा ने दो बच्चों को पानी की तेज धार में बहते देखा तो अपनी जान की परवाह नहीं कर उसे बचाने में लग गई। उसने दोनों बच्चों को तो बचा लिया लेकिन खुद तेज धार की चपेट में आ गई। उसकी काफी खोजबीन की गई लेकिन कुछ पता नहीं चला। दूसरे दिन उसका शव बरामद हुआ। शव बरामद होने के बाद लोग सिर्फ यही कह रहे थे कि बच्चों को बचाने में अपनी जान गंवा दी।
पड़ोसियों के थे दोनों बच्चे
जिन दो बच्ची को सांझा ने बचाया वे उसके पड़ोसी हैं। इसमें चंद्रमोहन यादव की पुत्री निराशा कुमारी (8) और श्याम मंडल की पुत्री रोशनी कुमारी (7) शामिल हैं। डूबने से बची अन्य महिलाएं बताती हैं कि जिस समय सभी महिलाएं बचने के लिए हाथ-पैर मार रही थी उस समय सांझा इन दोनों बच्चियों को बचाने में जुटी थी।
रसोइया का काम करती थी सांझा
शिव नारायण यादव की पत्नी सांझा देवी गांव के ही नवसृजित विद्यालय में रसोइया का काम करती थीं। गरीब परिवार से ताल्लुक रखने के कारण रसोइया के रूप में जो कमाई होती थी उससे परिवार को आर्थिक आधार मिलता था। सांझा की मौत बाद परिवार का आर्थिक आधार भी प्रभावित हुआ है।