Kosi Live-कोशी लाइव SAHARSA/BIHAR:तीन दर्जन दारोगा और जमादार पर गिर सकती है निलंबन की गाज - Kosi Live-कोशी लाइव

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Monday, May 4, 2020

SAHARSA/BIHAR:तीन दर्जन दारोगा और जमादार पर गिर सकती है निलंबन की गाज

सहरसा। ऑफ डेली रिपोर्ट कांड में अनुसंधानकर्ताओं द्वारा अंतिम प्रपत्र समर्पित नहीं करने वाले तीन दर्जन से अधिक दारोगा और जमादार पर निलंबन की गाज गिर सकती है। ऐसे दारोगा और जमादार को निदन की सजा देते हुए कोसी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक सुरेश प्रसाद चौधरी ने एक माह के अंदर अंतिम प्रपत्र समर्पित करने का आदेश दिया है।

डीआइजी ने सदर और सिमरी बख्तियारपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि पुलिस मुख्यालय के पत्र के आलोक में जिले के सभी अंचल पुलिस निरीक्षक, थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक तथा अभियोजन कोषांग के पदाधिकारियों के साथ लंबित कांडों के बुझारत की समीक्षा की गई थी। जिसमें यह बातें सामने आई थी कि कुछ अनुसंधानकर्ता जिले से बाहर चले गये तो कुछ का क्षेत्र से बाहर स्थानांतरण हो गये हैं। जबकि कुछ दूसरे थाना में स्थानांतरित हो गये। परंतु अनुसंधानकर्ताओं द्वारा निष्पादित दिखाए गये कांडों में अंतिम प्रपत्र आरोप पत्र समर्पित नहीं किया गया है। यह कार्यप्रणाली चिता का विषय है। डीआइजी ने कहा है कि निष्पादित दिखाए गये कांडों में अंतिम प्रपत्र समर्पित कराये जाने के दिशा में न तो पुलिस निरीक्षक स्तर से और न ही अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के स्तर से कार्रवाई कराई गई।

उन्होंने 40 से अधिक दारोगा व जमादार के पास लंबित कांड की सूची संलग्न करते हुए कहा है कि सूची में दर्शाये गये कांड काफी पुराने हैं, अनुसंधानकर्ता के द्वारा निष्पादन के प्रति उदासीन हो जाना अत्यंत गंभीर बात है। डीआइजी ने कांड के निष्पादन में बरती जा रही लापरवाही के लिए सभी अनुसंधानकर्ताओं की सेवा पुस्तिका में एक-एक निदन की सजा देते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को एक माह के अंतर सभी कांड में अंतिम प्रपत्र न्यायालय में समर्पित करवाते हुए प्रमाण पत्र देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि निर्धारित अवधि एक माह के अंदर कांड के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा आरोप पत्र समर्पित नहीं करने पर निलंबित करने की बात कही है। वीं एसडीपीओ व पुलिस निरीक्षकों के गोपनीय चरित्र अभियुक्ति में प्रतिकुल टिप्पणी अंकित करने की भी चेतावनी दी है।

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एक आइओ के पास हैं सौ से अधिक कांड

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डेली रिपोर्ट में कांड को निष्पादित कर न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित नहीं करने वाले कांडों की संख्या करीब एक हजार है। इनमें से सदर थाना के कुछ अनुसंधानकर्ता के पास सौ से अधिक केस हैं। जबकि कुछ के पास दर्जनों कांड हैं।