बेगूसराय. देशव्यापी तालाबंदी (Lockdown) की वजह से नए-नए जुड़े दिल के रिश्तों में भी खटास पैदा होने लगी हैं. जिन रिश्तों के होने को लोग अपना सौभाग्य मानते थे और लोग मेहमानों की आवभगत से नहीं थकते थे, वहीं अब लोगों को कहना पड़ रहा है कि हम आपकी रोटी की जुगाड़ नहीं कर सकते, आप अपनी व्यवस्था खुद करें. ऐसा ही एक मामला बेगूसराय के बलिया (Ballia of Begusarai) में सामने आया है जहां शादी के अगले दिन से ही पूरी बारात कोरोनाबंदी में फंस गई और अब डेढ़ महीने से मेहमाननवाजी कर रहे लोगों को अपने मेहमान ही भारी लगने लगे हैं.
यूपी के कानपुर से पहुंची थी बारात
दरअसल यूपी के कानपुर जिला के चौबेपुर कस्बे से बिहार के बेगूसराय आयी बारात 45 दिनों से बलिया में फंसी हुई है.
इसमें दूल्हा समेत 10 बाराती लड़कीवालों के यहां ठहरे हैं. लड़के वालों के पास जब पैसे खत्म हो गए तो दुल्हन खुद उन सभी बारातियों की खाने की खर्चा उठा रही है. इतना ही नहीं दोनों पक्ष के लोग एक दूसरे की मदद करते नजर आ रहे हैं. ट्रेन से से आयी बारात को अब रेल सेवाएं बहाल होने का इंतजार है.
चौबेपुर के हकीम नगर मोहल्ले से महबूब खान के 30 वर्षीय पुत्र इम्तियाज की शादी बेगूसराय के बलिया प्रखंड क्षेत्र के फतेहपुर गांव की खुशबू खातून के साथ हुई है. बारात में दूल्हा इम्तियाज, पिता महबूब, मां शरीना बेगम, दूल्हे के खालू (मौसा) जलील खान, बहनोई नदीम नाजीन, मासूम नुजन, बिचवानी रियाज अहमद व पड़ोसी अकरम 20 मार्च को ही फतेहपुर गांव आए थे.21 मार्च को मुस्लिम धर्म के मुताबिक निकाह की रस्म अदा की गई थी. सभी दस बारातियों को अगले दिन दुल्हन के साथ अपने घर कानपूर लौटना था. मगर 22 को जनता कर्फ्यू लग गयी. जिसके बाद कोरोना बंदी के कारण आवागमन बन्द हो गया.
सरकार से मदद की गुहार
अब लड़की पक्ष ने 45 दिन बाद हाथ खड़े कर दिये हैं. वहीं लड़की खुशबू खातून ने बताया कि अब बारातियों को नमक रोटी में खिलाने पर भी आफत हो गई है. जिससे हम घर वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अगर प्रशासन इन बारातियों के खाने की खर्चे उठा लेता है तो हम लोगों कुछ परेशानी कम हो जाएगी.
चौबेपुर के हकीम नगर मोहल्ले से महबूब खान के 30 वर्षीय पुत्र इम्तियाज की शादी बेगूसराय के बलिया प्रखंड क्षेत्र के फतेहपुर गांव की खुशबू खातून के साथ हुई है. बारात में दूल्हा इम्तियाज, पिता महबूब, मां शरीना बेगम, दूल्हे के खालू (मौसा) जलील खान, बहनोई नदीम नाजीन, मासूम नुजन, बिचवानी रियाज अहमद व पड़ोसी अकरम 20 मार्च को ही फतेहपुर गांव आए थे.21 मार्च को मुस्लिम धर्म के मुताबिक निकाह की रस्म अदा की गई थी. सभी दस बारातियों को अगले दिन दुल्हन के साथ अपने घर कानपूर लौटना था. मगर 22 को जनता कर्फ्यू लग गयी. जिसके बाद कोरोना बंदी के कारण आवागमन बन्द हो गया.
सरकार से मदद की गुहार
अब लड़की पक्ष ने 45 दिन बाद हाथ खड़े कर दिये हैं. वहीं लड़की खुशबू खातून ने बताया कि अब बारातियों को नमक रोटी में खिलाने पर भी आफत हो गई है. जिससे हम घर वालों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अगर प्रशासन इन बारातियों के खाने की खर्चे उठा लेता है तो हम लोगों कुछ परेशानी कम हो जाएगी.
