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Sunday, May 31, 2020

BIHAR NEWS:पूर्णिया एयरपोर्ट के लिए चलाया अभियान, हवाई सेवा शुरू होने से सीमांचल, कोसी समेत 7 जिलों को मिलेगा लाभ



बिहार के पूर्णिया जिले से उड़ान भरने के अरमान को लेकर प्रबुद्धजनों के द्वारा अभियान शुरू किया गया है। जिले में एयरपोर्ट की जरूरत को समझते हुए ट्विटर पर हजारों लोगों ने उड़ान के ख्वाब को हकीकत में बदलने की मांग की है। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों ने ट्वीट किया, जिसके बाद रविवार को #PurneaAiport ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। पूर्णिया सैन्य हवाई अड्डा पर संयुक्त परिचालन के तहत सिविल इनक्लेव एवं संपर्क पथ निर्माण परियोजना के लिए जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को जल्द उपलब्ध करायी जाएगी। भू अर्जन परियोजना के तहत 52.18 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। रैयतों के साथ सुनवाई के लिए मार्च माह में तारीख भी तय कर दी गयी थी।

मगर कोरोना महामारी के कारण सुनवाई नहीं हो पायी। लॉकडाउन के बाद रैयतों के साथ सुनवाई के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पूर्णिया सैन्य हवाई अड्डा में नौ हजार फीट का रनवे है। चूनापुर में यह हवाई अड्डा 1960 के दशक से है।

बता दें कि पूर्णिया सैन्य हवाई अड्डा से संयुक्त परिचालन के तहत सिविल इनक्लेव एवं संपर्क पथ निर्माण परियोजना के लिए सिविल विमानन निदेशालय पटना की अधियाचना पर गोआसी के समीप 52.18 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। अधियाचना के बाद इसका सोशल इकोनामिक इम्पैक्ट (एसआईए) अध्ययन कार्य एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान पटना से कराया गया था। एसआईए प्रतिवेदन का मूल्यांकन विशेषज्ञ समूह से भी कराया गया था। भूमि एवं राजस्व विभाग की मंजूरी भी प्राप्त कर ली गयी है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद रैयतों के साथ सुनवाई के बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके बाद जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को हैंडओवर कर दी जाएगी।

सात जिलों के लोगों को मिलेगा लाभ
सैन्य हवाई अड्डा से संयुक्त परिचालन के लिए 2014 से ही पूर्णिया एयरपोर्ट के विस्तारीकरण का मामला पाइप लाइन में है। जमीन अधिग्रहण के लिए 20.50 करोड़ की राशि सरकारी खजाने में जमा है। पूर्णिया से हवाई सेवा शुरू होने पर सीमांचल और कोसी के सात जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। अभी उन्हें दिल्ली जाने के लिए बागडोगरा जाना पड़ता है। इससे धन के साथ समय भी जाया हो रहा है।

1934 में लाल बालू से माउंट एवरेस्ट की उड़ान
पूर्णिया की सरजमीं ने अंग्रेजों के हौसले को उड़ान दी। 1934 में अंग्रेजों ने पूर्णिया शहर से पूर्व में स्थित लाल बालू से माउंट एवरेस्ट के लिए उड़ान भरी थी। अंग्रेजों ने यहां से माउंटर एवरेस्ट की 33 हजार फीट ऊंचाई मापी थी। इसके तहत डगरूआ के लाल बालू में फ्लाइंग बेस तैयार किया गया था। उस वक्त जहाज को उड़ान भरते देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े थे।

एयरपोर्ट को लेकर शुरू से प्रयासरत : डीएम
जिलाधिकारी राहुल कुमार ने कहा कि पूर्णिया एयरपोर्ट को लेकर वह शुरू से प्रयासरत हैं। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। मामला अदालत में भी है। रैयतों के साथ सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जमीन अधिग्रहण को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। लॉकडाउन के कारण रैयतों के साथ सुनवाई नहीं हो पायी है। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को हैंडओवर कर दी जाएगी।