सहरसा। कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के कारण न्यायालय ने बंदियों को पीआर बांड पर बंदियों को जमानत देना प्रारंभ कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को मंडल कारा में बंद एक बंदी को सहरसा व्यवहार न्यायालय ने बिना जमानतदार के ही जमानत दे दी है। इनकी न्यायिक प्रक्रिया चलती रहेगी और बाद में न्यायालय में जमानतदार को भी प्रस्तुत किया जाएगा। मंडल काराधीक्षक ने सुरेश चौधरी ने बताया कि इस तरह के लगभग दो दर्जन बंदी की सूची उनके द्वारा न्यायालय को समर्पित की गई है, जिन्हें इस प्रक्रिया से जमानत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह सूची न्यायालय के आदेश ही भेजी गई है। इसलिए उम्मीद है इस तरह के अन्य बंदियों को भी पीआर बांड पर बाहर आने की सुविधा मिल सकेगी।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा सहरसा मंडल कारा में विभिन्न मामलों में बंद 130 बंदियों की रिहाई के लिए निदेशानुसार विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि महानिरीक्षक कारा द्वारा मांगे गए प्रतिवेदन के जबाव में सहरसा मंडल कारा में बंद बंदियों की विभिन्न मामलों में न्यायालय में चल रही सुनवाई और संभावित सजा के मुतल्लिक अलग-अलग सूची बनाई गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे बंदी जिन्हें तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है उनकी संख्या 37 है, पांच वर्ष तक संभावित सजा वाले 34 और सात वर्ष संभावित सजावाले 59 बंदियों को सूचीबद्ध कर कारा महानिरीक्षक को भेज गया है। उन्होंने कहा कि बंदियों को रिहा करने के लिए सरकार के निर्णय पर सबकुछ निर्भर करता है। सरकार का जिसप्रकार का आदेश प्राप्त होगा, उसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। उसी की प्रतीक्षा की जा रही है।