सहरसा। पूरा देश जहां कोरोना वायरस की जंग लड़ रहा है, वहीं जिले के महिषी प्रखंड के राजनपुर गांव का कैंसर पीड़ित इवरान आलम जिदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। लॉकडाउन होने के बाद जहां उसका कीमो नहीं हो सका। वहीं पटना एम्स में इलाज कराने वह नहीं जा पा रहा है। जबकि उसकी तकलीफ दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जिससे परिवार के लोग परेशान हैं।
इवरान की पत्नी शहनाज परवीन ने बताया कि चार माह पूर्व पटना एम्स में दिखाया था। जांच पड़ताल के बाद डॉक्टरों ने मुंह का कैंसर होने की बातें कही। इसके बाद वहां इलाज शुरू हुआ। 20 मार्च को पटना एम्स के डॉक्टर ने 23 मार्च को कीमो की तिथि निर्धारित की। जिसके बाद सर्जरी करने की बातें कही। इसपर इवरान अपने स्वजनों के साथ पटना से गांव लौट आए। 22 मार्च को पटना जाना था। लेकिन जनता कर्फ्यू रहने के कारण वह पटना नहीं जा सका। इसके बाद सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया। लॉकडाउन होने के बाद इवरान और उसके स्वजनों की नींद ही उड़ गई। पटना में अभी एम्स में ओपीडी बंद है। इवरान का कहना है कि कोरोना से बचाव जरूरी है, लेकिन उनपर तो गम का पहाड़ टूट गया है। अगर ओपीडी भी चलता रहता तो शायद किसी तरह पटना पहुंचकर इलाज करा लेता। वहीं इवरान के स्वजन कहते हैं कि कैंसर का नाम सुनते ही जहां पूरे घर में मातम छा गया था। वहीं अब इलाज नहीं होने और उसके बढ़ते दर्द को देखकर सभी परेशान हैं।