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Saturday, March 28, 2020

Bihar Lockdown 5: एसपी को दीं गालियां, बदले में मिला सम्‍मान; जान कर हो जाएंगे हैरान

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किशनगंज। Bihar Lockdown 5: बिहार में कोरोना संक्रमण (CoronaVirus Infection) को रोकने के लिए लॉकडाउन (Lockdown) का यह प्रभाव आपको हैरान कर देगा। लॉकडाउन से परेशान कुछ युवकों ने पुलिस अधीक्षक (SP) को फोन कर गालियां दीं, लेकिन बदले में उन्‍हें जो सम्‍मान मिला, उससे वे हैरत में पड़ गए। दरअसल, परेशान युवकों ने किशनगंज के एसपी को इसलिए गालियां दीं कि इस कारण उन्‍हें जेल (Jail) भेज दिया जाए, जहां कम-से-कम रहने का ठौर और भोजन तो मिले। उन्‍हें रहने-खाने की सुविधा मिली, लेकिन जेल नहीं हुई।
मजदूरों ने किशनगंज एसपी को दी गालियां
गुरुवार की शाम में किशनगंज के एसपी (SP Kishanganj) कुमार आशीष (Kumar Ashish) को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर गालियां देनी शुरू कर दी। एसपी ने धैर्य से पूरी गालियां सुनी, फिर विनम्रता से उसकी समस्या के बारे में पूछा। मालूम हुआ कि बिहार के नवादा जिले से आठ मजदूर पैसे और भोजन के बिना पिछले तीन दिनों से गुजरात के सूरत में फंसे हुए हैं। उन युवकों ने सोचा कि किसी अधिकारी अथवा एसपी को गाली दें तो जेल जाना पड़ेगा। जेल में जिंदा रहने के लिए भोजन तो मिल ही जाएगा।

नवादा डीएम ने दिया मदद का भरोसा
घटना की जानकारी देते हुए एसपी ने बताया कि समस्या उनके जिले की नहीं थी, ना ही वे फोन करने वालों से परिचित थे, इस कारण उन्होंने उनका नाम-पता नहीं पूछा। इसके बाद उन्होंने तुरंत नवादा के डीएम (DM Nawada) यशपाल मीणा (Yashpal Meena) को इसकी जानकारी दी। डीएम ने परेशान युवकों की यथासंभव मदद करने का आश्वासन भी दिया।
मजदूरों को मिली रहने-खाने की व्‍यवस्‍था
शुक्रवार को नवादा डीएम ने बिहार निवासी गुजरात के विभिन्न अधिकारियों के वॉट्सएप ग्रुप्‍स (WhatsApp Groups) के माध्यम से संपर्क किया। उनके द्वारा फौरन सूरत में व्‍यवसायी तथा झारखंड के मूल निवासी अशोक केजरीवाल (Ashok Kejriwal) से संपर्क किया गया। अशोक केजरीवाल सभी आठ मजदूरों को आवश्यक देखभाल के लिए सूरत में अपने फार्म हाउस पर ले गए। उन्‍हें खाना-आवास की सुविधा दी, साथ में हजार-हजार रुपये भी दिए।
मुश्किल घड़ी में इंसानियत जिंदा रखने का अवसर
पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए किशनगंज के एसपी कुमार आशीष ने कहा कि इस विषम परिस्थिति में किसी के लिए मददगार बनना अच्छा लगता है। यह मुश्किल घड़ी है और इंसानियत को जिंदा रखने का एक अवसर भी है।