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Saturday, January 25, 2020

मधेपुरा।वामदलों के आह्वान पर सीएए,एनपीआर,और एनआरसी के विरुद्ध मानव श्रृंखला।

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              रिपोर्ट-मंजर आलम

उदाकिशुनगंज(मधेपुरा)25जनवरी- नागरिकता संशोधन अधिनियम ,एन०पी० आर०और एन०आर०सी० के विरोध में भाकपा व वामदलों की ओर से मानवश्रृंख्ला का आयोजन किया गया।इस मानवश्रृंख्ला की लम्बी कतार उदाकिशुनगंज अनुमंडल मुख्यालय में भी देखने को मिला। मानवश्रृंख्ला के दौरान राजद ,जन अधिकार पार्टी,वामदलों सहित कई अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने अपनी सहभागिता प्रदर्शित की। उदाकिशुनगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर डेहरू, मंजौरा, रहुआ, जोतैली, नरदह,रहठा सिंगापुर, आदि के हजारों लोगों ने इस मानव श्रृंख्ला में भाग लिया। सबसे अहम बात यह रही कि इसमें समाज की महिलाओं, बुजुर्गों और छात्र छात्राओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।गौरतलब हो कि नागरिकता संशोधन अधिनियम2019के मुताबिक़ भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश में उत्पीड़ित अल्पसंख्यक  हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारत में शरण देखकर उसे भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इस अधिनियम का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों का मानना है कि इसमें कई समुदाय के लोगों विशेषकर मुसलमानों में अहमदिया, शिया,बोहरा जैसे अल्पसंख्यक वर्गों को नजरअंदाज किया गया है।इसके अलावा भारत के ही अन्य पड़ोसी देश श्रीलंका, म्यांमार, नेपाल ,चीन जैसे देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों की भी अनदेखी की गई है जहाँ तमिल हिंदू, रोहिंग्या मुसलमानों की भी स्थिति अच्छी नहीं है। भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास करती है और विभिन्नता में एकता भारत की पहचान रही है।भारत का संविधान धर्म के आधार पर कभी भेदभाव की अनुमति नहीं देता। इस तरह देखा जाए तो यह काला कानून संविधान की आत्मा पर चोट करता है।सर्वविदित है कि इस काले कानून के विरोध में पूरे देश में जन आंदोलन व्यापक रूप धारण करण कर लिया है और इसकी गूँज अब गाँव गाँव तक पहूँच चूकी है।मानवश्रृंख्ला में आए लोगों का यह भी कहना था कि वह संविधान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कैसा समय आ गया है कि अब अपने ही देश में अपनी नागरिकता साबित करने के लिए लाईनों में खड़ा होना पड़ेगा और प्रमाण दिखा कर  अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी। छात्र व युवाओं की माँग थी कि देश के बुनियादी मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए हमें इन मुद्दों में उलझाया जा रहा है।एनपीआर और एनआरसी से समाज के हर वर्ग प्रभावित होंग तथा दलित,पिछड़े, आदिवासियों अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप कमजोर लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
मानवश्रृंख्ला में खड़े लोगों ने अपने हाथों में "संविधान बचाओ- देश बचाओ"  "हम हैं भारत" , "हमभारत के लोग- सीएए,एनपीआर, एनआरसी हमें स्वीकार नहीं" , "प्यार बाँटो देश नहीं","नो सीएए नो एनपीआर ,नो एनआरसी हमें मंजूर नहीं" सभी का खून शामिल है यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़े है" सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तां हमारा हम बुलबुले हैं इसकी यह गुलसितां हमारा," जैसे स्लोगन लिखे प्लेकार्ड हाथों में रखे हुए थे।
        इस अवसर पर वामदल के उमाकांत सिंह,जाप प्रखंड अध्यक्ष डा०धर्मेंद्र यादव, राजद के युवा प्रखंड अध्यक्ष रमण कुमार, राजद नेता अयूब अली, मो०चाँद,पूर्व प्रमुख विकास चन्द्र यादव,मुखतार  आलम,मो० मतीन, मुखिया अब्दुल अहद, सिकंदर अंसारी,बिहार यूथ आर्गेनाइजेशन के सदस्य जफर अहमद, इमारत ए शरिया बिहार के नकीब मौलाना अब्दुल जलील कासमी, निसार आलम, मो०इसराफिल,अकरम अंसारी, अब्दुल कुद्दूस, ऐनुल अंसारी,हाफिज फैयाज ,अमीर उद्दीन,समरूल हक, असमत अंसारी, नजाम रैन, मनीर रैन, इलियास रैन,हीरा अंसारी, गायत्री देवी,हलधर शर्मा, फिरोज आलम, मिथुन शर्मा, मोती ठाकुर,किरण देवी,शहजादी बेगम,मोती सिंह,विद्यानंद पंडित, सिकंदर राम, गुलाबचंद पासवान, गजेन्द्र पासवान, आदि उपस्थित रहे।