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मधेपुरा।
सामाजिक योद्धा थे कर्पूरी ठाकुर , चार दशक पहले ही दिया महिलाओं और गरीब स्वर्णो को आरक्षण, जिसने अपमान का घूंट पीकर भी बदलाव की इबारत लिखी
शुक्रवार को छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने हर्षोल्लाशपूर्ण जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्मदिन मनाया गया
इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय प्रधानमहासचिव:- जापानी यादव ने बताया :
कर्पूरी ठाकुर का जीवन ताउम्र संघर्ष रहा. 1978 में बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जब उन्होंने हाशिये पर धकेल दिये वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में 26 प्रतिशत आरक्षण लागू किया तो उन्हें क्या-क्या न कहा गया. लोग उनकी मां-बहन-बेटी-बहू का नाम लेकर भद्दी गालियां देते. अभिजात्य वर्ग के लोग उन पर तंज कसते हुए कहते - कर कर्पूरी कर पूरा, छोड़ गद्दी, धर उस्तरा. यह तंज इसलिए कि कर्पूरी ठाकुर नाई समुदाय से ताल्लुक रखते थे.
याद हो कि 1977 में वे दोबारा मुख्यमंत्री बने तो एस-एसटी के अलावा ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने वाला बिहार देश का पहला सूबा बना. 11 नवंबर 1978 को उन्होंने महिलाओं के लिए तीन (इसमें सभी जातियों की महिलाएं शामिल थीं), ग़रीब सवर्णों के लिए तीन और पिछडों के लिए 20 फीसदी यानी कुल 26 फीसदी आरक्षण की घोषणा की. इसके लिए ऊंचे तबकों ने एक बड़े वर्ग ने भले ही कर्पूरी ठाकुर को कोसा हो, लेकिन वंचितों ने उन्हें सर माथे बिठाया. इस हद तक कि 1984 के एक अपवाद को छोड़ दें तो वे कभी चुनाव नहीं हारे.
वही मौके पर मौजूद विश्वविद्यालय कौंसिल मेंबर माधव कुमार तथा नीतीश यदुवंशी ने बताया कि :
1978 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने सिंचाई विभाग में 17000 पदों के लिए आवेदन मंगाए. हफ्ता भर बीतते-बीतते उनकी सरकार गिर गई. कई इन दोनों बातों का आपस में संबंध मानते हैं. उनके मुताबिक पहले होता यह था कि बैक डोर से अस्थायी बहाली कर दी जाती थी, बाद में उसी को नियमित कर दिया जाता था. माना जाता है कि एक साथ इतने लोग खुली भर्ती के ज़रिये नौकरी पाएं, यह सरकारी व्यवस्था पर कुंडली मारकर बैठे एक वर्ग को मंजूर नहीं था सो कर्पूरी ठाकुर को जाना पड़ा.
लालू प्रसाद यादव के वे राजनीतिक आदर्श के साथ-साथ आदरणीय कर्पूरी जी के व्यक्तित्व से काफी लालू जी प्रभावित रहते थे. और हो सकता है कि जनता से संवाद की चतुराई का कुछ हिस्सा आदरणीय लालू यादव जी ने उनसे भी अपने जिंदगी में उतारा, इसका अंदाजा एक किस्से से भी लगाया जा सकता है. अपनी मौत से तीन महीने पहले कर्पूरी ठाकुर एक कार्यक्रम में शिरकत करने अलौली गए थे. वहां मंच से वे बोफोर्स पर बोलते हुए राजीव गांधी के स्विस बैंक के खाते का उल्लेख कर रहे थे. भाषण के दौरान ही उन्होंने धीरे से एक पर्ची पर लिखकर पूछा कि ‘कमल’ को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं. लोकदल के तत्कालीन ज़िला महासचिव हलधर प्रसाद ने उस स्लिप पर ‘लोटस’ लिख कर कर्पूरी जी की ओर बढ़ाया. इसके बाद उन्होंने कहा, ‘राजीव मने कमल, और कमल को अंग्रेजी में लोटस बोलते हैं. इसी नाम से स्विस बैंक में खाता है राजीव गांधी का.’ इस बात की ख़बर चली हर जगह .
और लालू जी एवम कर्पूरी जी की जुगलबंदी की प्रख्याति चारो और फैली ।
मौके पर मौजूद अभिलाष, किशोर,नवीन एवम सोनू निगम ने एक स्वर में बताया की :
कर्पूरी ठाकुर दोस्त का फटा कोट पहनकर गए थे ऑस्ट्रिया, युगोस्लाविया के मार्शल टीटो ने नया गिफ्ट किया था
कर्पूरी जी ने मंत्री बनते 8वीं तक की शिक्षा मुफ्त की, उर्दू को दिया द्वितीय राजभाषा का दर्जा, 5 एकड़ पर मालगुजारी खत्म की
कर्पूरी ठाकुर ने कहा था- जिस देश की बड़ी आबादी गरीबी मेंजी रही हो, वहां सांसदों-विधायकों को पेंशन देना वाजिब नहीं
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वार्थ में सांसदों-विधायकों को प्रलोभन देते हुए मासिक पेंशन का कानून बनाया। इसकी कोई जरूरत नहीं थी। किसी ने ऐसी मांग नहीं की थी। कर्पूरी जी ने आक्रोशपूर्ण लहजे में कहा था कि मासिक पेंशन देने का कानून ऐसे देश में पारित हुआ है, जहां 60 में 50 करोड़ (तब की आबादी) लोगों की औसत आमदनी साढ़े तीन आने से दो रुपए है। यदि देश के दरिद्र लोगों के लिए 50 रुपए मासिक पेंशन की व्यवस्था हो जाती, तो बड़ी बात होती। जब इंदिरा जी ने संविधान संशोधन के जरिये लोकसभा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया, तो कर्पूरी जी को बहुत बुरा लगा था।
ऐसे महान व्यक्तिव के धनी थे हमारे महान जननायक कर्पूरी ठाकुर ।
श्रद्धांजलि स्थल पर मौजूद दर्जनों छात्र राजद के कार्येकर्ता मौजूद थे जहाँ अक्षय कुमार, सीटू सेम, अंकेश कुमार, रंजीत यादव, मनीष कुमार, पवन कुमार, सिंटू कुमार, रोशन कुमार , इत्यादि भारी संख्या में मौजूद थे ।
मधेपुरा।
सामाजिक योद्धा थे कर्पूरी ठाकुर , चार दशक पहले ही दिया महिलाओं और गरीब स्वर्णो को आरक्षण, जिसने अपमान का घूंट पीकर भी बदलाव की इबारत लिखी
शुक्रवार को छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने हर्षोल्लाशपूर्ण जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्मदिन मनाया गया
इस मौके पर अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय प्रधानमहासचिव:- जापानी यादव ने बताया :
कर्पूरी ठाकुर का जीवन ताउम्र संघर्ष रहा. 1978 में बिहार का मुख्यमंत्री रहते हुए जब उन्होंने हाशिये पर धकेल दिये वर्ग के लिए सरकारी नौकरियों में 26 प्रतिशत आरक्षण लागू किया तो उन्हें क्या-क्या न कहा गया. लोग उनकी मां-बहन-बेटी-बहू का नाम लेकर भद्दी गालियां देते. अभिजात्य वर्ग के लोग उन पर तंज कसते हुए कहते - कर कर्पूरी कर पूरा, छोड़ गद्दी, धर उस्तरा. यह तंज इसलिए कि कर्पूरी ठाकुर नाई समुदाय से ताल्लुक रखते थे.
याद हो कि 1977 में वे दोबारा मुख्यमंत्री बने तो एस-एसटी के अलावा ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने वाला बिहार देश का पहला सूबा बना. 11 नवंबर 1978 को उन्होंने महिलाओं के लिए तीन (इसमें सभी जातियों की महिलाएं शामिल थीं), ग़रीब सवर्णों के लिए तीन और पिछडों के लिए 20 फीसदी यानी कुल 26 फीसदी आरक्षण की घोषणा की. इसके लिए ऊंचे तबकों ने एक बड़े वर्ग ने भले ही कर्पूरी ठाकुर को कोसा हो, लेकिन वंचितों ने उन्हें सर माथे बिठाया. इस हद तक कि 1984 के एक अपवाद को छोड़ दें तो वे कभी चुनाव नहीं हारे.
वही मौके पर मौजूद विश्वविद्यालय कौंसिल मेंबर माधव कुमार तथा नीतीश यदुवंशी ने बताया कि :
1978 में कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने सिंचाई विभाग में 17000 पदों के लिए आवेदन मंगाए. हफ्ता भर बीतते-बीतते उनकी सरकार गिर गई. कई इन दोनों बातों का आपस में संबंध मानते हैं. उनके मुताबिक पहले होता यह था कि बैक डोर से अस्थायी बहाली कर दी जाती थी, बाद में उसी को नियमित कर दिया जाता था. माना जाता है कि एक साथ इतने लोग खुली भर्ती के ज़रिये नौकरी पाएं, यह सरकारी व्यवस्था पर कुंडली मारकर बैठे एक वर्ग को मंजूर नहीं था सो कर्पूरी ठाकुर को जाना पड़ा.
लालू प्रसाद यादव के वे राजनीतिक आदर्श के साथ-साथ आदरणीय कर्पूरी जी के व्यक्तित्व से काफी लालू जी प्रभावित रहते थे. और हो सकता है कि जनता से संवाद की चतुराई का कुछ हिस्सा आदरणीय लालू यादव जी ने उनसे भी अपने जिंदगी में उतारा, इसका अंदाजा एक किस्से से भी लगाया जा सकता है. अपनी मौत से तीन महीने पहले कर्पूरी ठाकुर एक कार्यक्रम में शिरकत करने अलौली गए थे. वहां मंच से वे बोफोर्स पर बोलते हुए राजीव गांधी के स्विस बैंक के खाते का उल्लेख कर रहे थे. भाषण के दौरान ही उन्होंने धीरे से एक पर्ची पर लिखकर पूछा कि ‘कमल’ को अंग्रेज़ी में क्या कहते हैं. लोकदल के तत्कालीन ज़िला महासचिव हलधर प्रसाद ने उस स्लिप पर ‘लोटस’ लिख कर कर्पूरी जी की ओर बढ़ाया. इसके बाद उन्होंने कहा, ‘राजीव मने कमल, और कमल को अंग्रेजी में लोटस बोलते हैं. इसी नाम से स्विस बैंक में खाता है राजीव गांधी का.’ इस बात की ख़बर चली हर जगह .
और लालू जी एवम कर्पूरी जी की जुगलबंदी की प्रख्याति चारो और फैली ।
मौके पर मौजूद अभिलाष, किशोर,नवीन एवम सोनू निगम ने एक स्वर में बताया की :
कर्पूरी ठाकुर दोस्त का फटा कोट पहनकर गए थे ऑस्ट्रिया, युगोस्लाविया के मार्शल टीटो ने नया गिफ्ट किया था
कर्पूरी जी ने मंत्री बनते 8वीं तक की शिक्षा मुफ्त की, उर्दू को दिया द्वितीय राजभाषा का दर्जा, 5 एकड़ पर मालगुजारी खत्म की
कर्पूरी ठाकुर ने कहा था- जिस देश की बड़ी आबादी गरीबी मेंजी रही हो, वहां सांसदों-विधायकों को पेंशन देना वाजिब नहीं
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वार्थ में सांसदों-विधायकों को प्रलोभन देते हुए मासिक पेंशन का कानून बनाया। इसकी कोई जरूरत नहीं थी। किसी ने ऐसी मांग नहीं की थी। कर्पूरी जी ने आक्रोशपूर्ण लहजे में कहा था कि मासिक पेंशन देने का कानून ऐसे देश में पारित हुआ है, जहां 60 में 50 करोड़ (तब की आबादी) लोगों की औसत आमदनी साढ़े तीन आने से दो रुपए है। यदि देश के दरिद्र लोगों के लिए 50 रुपए मासिक पेंशन की व्यवस्था हो जाती, तो बड़ी बात होती। जब इंदिरा जी ने संविधान संशोधन के जरिये लोकसभा का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया, तो कर्पूरी जी को बहुत बुरा लगा था।
ऐसे महान व्यक्तिव के धनी थे हमारे महान जननायक कर्पूरी ठाकुर ।
श्रद्धांजलि स्थल पर मौजूद दर्जनों छात्र राजद के कार्येकर्ता मौजूद थे जहाँ अक्षय कुमार, सीटू सेम, अंकेश कुमार, रंजीत यादव, मनीष कुमार, पवन कुमार, सिंटू कुमार, रोशन कुमार , इत्यादि भारी संख्या में मौजूद थे ।
