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सहरसा। गुरूवार को पूर्व निर्धारित आंदोलन के तहत नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ वामदलों के आह्वान पर सहरसा बंद रहा। सुबह से ही बंद समर्थकों का जुलूस हाथ में पार्टी का झंडा लिए शहर की सड़कों पर घूमता रहा। बंद समर्थकों ने सहरसा स्टेशन सहित सहरसा कचहरी स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन को रोककर प्रदर्शन किया तथा केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नागिरकता संशोधन विधेयक, एनआरसी एवं महिला उत्पीड़न के खिलाफ वामदलों के आह्वान पर बिहार बंद के दौरान सहरसा में बंद का असर दिखा। बंद समर्थकों ने शहर के शंकर चौक, महावीर चौक, प्रशांत टाकीज रोड, थाना चौक, हटियागाछी, तिवारी टोला चौक, सहरसा कचहरी चौक को घंटों जाम कर यातायात बाधित कर दिया। इन चौक-चौराहों पर पुराने टायर में आग लगाकर सड़क यातायात को ठप कर दिया। जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गयी। चौक- चौराहों पर मानव श्रृंखला बनाकर बंद समर्थकों ने इस नागरिकता संशोधन विधेयक को काला कानून बताया। बंद का नेतृत्व मुख्य रूप से वामदलों की ओर से भाकपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश नारायण, सीपीएम के राज्य सचिव विनोद कुमार, जिला मंत्री रंधीर यादव, सीपीएम जिला सचिव मंडल सदस्य ह्दय नारायण यादव, गणेश प्रसाद सुमन, कृष्ण दयाल यादव, मो. शमीम, व्यास प्रसाद यादव, डोमी पासवान, रूपेश रंजन, गुरूदेव शर्मा, रामचंद्र महतो, शिवानंद विश्वास, शकील अहमद, रमाकांत राय, जनवादी नौजवान सभा के जिला संयोजक कुलानंद यादव, कैलाश प्रसाद स्वर्णकार, जनवादी महिला समिति की नेत्री डोली देवी, अनीता देवी, भाकपा माले के जिला सचिव ललन यादव, खेग्रामस के राष्ट्रीय पार्षद विक्की राम, इंसाफ मंच के जिलाध्यक्ष नईम आलम,इनौस जिलाध्यक्ष संतोष राम, विजेन्द्र यादव, मुकेश यादव, मो. युनूस, सीताराम यादव, अशोक कुमार सुमन, वीणा देवी, मीरा देवी, छात्र नेता कुंदन कुमार, पिकी देवी, बेचनी देवी, वकील कुमार यादव, प्रभु यादव, रंधीर ठाकुर, विक्रम यादव, कमल किशोर यादव आदि सक्रिय रहे। वहीं बंद कराने में शामिल लोकतांत्रिक जनता दल के जिलाध्यक्ष धनिकलाल मुखिया, युवाध्यक्ष धीरेन्द्र यादव, प्रदेश महासचिव उमर हयात गुडडु, मो. नूर अहमद राईन, शाहनवाज आलम, जिला महासचिव मानवेन्द्र ठाकुर खोखा, उपाध्यक्ष उदय चंद्र साह, शेर अफगान मिर्जा आदि कई कार्यकताओं ने जगह- जगह सड़क जाम कर बाजार को बंद कराया। बाजार तो बंद ही रहा। दिन के एक बजे के बाद दुकानें खुलनी शुरू हो गयी। सीपीआई के कार्यकर्ताओं ने राज्य सचिव मंडल सदस्य ओमप्रकाश नारायण के नेतृत्व में शहर के मुख्य बाजारों को बंद कराकर प्रदर्शन करते रहे। जिसमें विजय कुमार यादव, परमानंद ठाकुर, चन्द्रशेखर ठाकुर, कृष्णा प्रसाद साह, प्रभु लाल दास, उमेश पोद्दार, विनय कुमार वर्मा, राजकुमार चौधरी, शंकर कुमार, भूपेन्द्र प्रसाद यादव, उमेश चौधरी, सुरेश साह, मो. जाकिर, जयकिशोर, अरूण कुमार सिंह, संजय पासवान आदि चौक चौराहों पर सड़क जाम करते रहे। वहीं जन अधिकार पार्टी के जिलाध्यक्ष जीबू आलम, कार्यकारी अध्यक्ष रंजन यादव, युवा शक्ति के प्रदेश उपाध्यक्ष देवनारायण उर्फ नूनू यादव, महासचिव सह मुखिया इंदल यादव, अनवार सिद्धिकी, गणेश यादव, मुखिया मनोज पासवान, युवा कार्यकारी जिलाध्यक्ष संजय यादव, नरेश निराला, पंकज क्रांति, तारिक खान के अलावा दर्जनों कार्यकर्ताओं की टोली बाइक जुलूस के रूप में शहर में घूम-घूमकर दुकान बंद कराते रहे और बंद के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।
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बच्चों को हुई परेशानी
स्कूल जानेवाले छोटे-छोटे बच्चों को घर में ही रहना पड़ गया। एक तो ठंड ज्यादा बढ़ी हुई थी वहीं दूसरी ओर बंद के आह्वान को लेकर पहले से ही अधिकांश स्कूलों ने बच्चों को लाने के लिए स्कूल बस नहीं भेज सके। इसके बाद भी कई तो अभिभावकों के साथ स्कूल गए। अधिकांश बच्चों को अभिभावकों ने घर से निकलने ही नहीं दिया। सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में कम ही बच्चे दिखे।
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ट्रेन के इंजन पर चढ़कर की नारेबाजी
बंद समर्थकों ने सुबह में करीब सवा सात बजे सहरसा स्टेशन से खुलनेवाली सहरसा- समस्तीपुर पैसेंजर ट्रेन को प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोककर प्रदर्शन करते रहे। ट्रेन के आगे रेल पटरी पर प्रदर्शन करते बंद समर्थकों को किसी तरह आरपीएफ ने समझा बुझाकर हटाया। करीब पन्द्रह मिनट तक यहां ट्रेन रुकी रही। करीब साढ़े सात बजे ट्रेन समस्तीपुर के लिए खुली। वहीं सहरसा कचहरी स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने सुपौल जा रही पैसेंजर ट्रेन को रोके रखा। प्रदर्शनकारी इंजन पर चढ़ गए और करीब आधा घंटा तक ट्रेन को रोके रखा। रेल सुरक्षा बल के प्रभारी निरीक्षक सारनाथ ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को ट्रेन के आगे से हटाया तब जाकर ट्रेन आगे बढ़ी।
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चौक-चौराहों पर थी पुलिस तैनात
बंद को लेकर पहले से ही जिला प्रशासन अलर्ट था। हर चौक- चौराहों पर पुलिस बलों की तैनाती कर दी गयी थी। पुलिस बल रहने से कहीं भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटी।
