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Sunday, December 22, 2019

बिहार:आर के श्रीवास्तव ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, 50 तरीकों से हल कर चुके हैं पाइथागोरस थ्योरम

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टीबी की बीमारी के चलते नही दे पाये थे आईआईटी प्रवेश परीक्षा, अब बना दिया सैकड़ो ( 259) गरीब स्टूडेंट्स को इंजीनियर----



मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर आरके श्रीवास्तव का आईआईटियन बनने का सपना उस समय टूट गया था जब टीबी की बीमारी होने के कारण आईआईटी की परीक्षा वे नही दे पाये। अपने सपने को जिद्द में बदलकर बना डाला सैकड़ो गरीब स्टूडेंट्स को इंजीनियर।


आरके श्रीवास्तव का जन्म बिहार राज्य के रोहतास जिले के बिक्रमगंज गांव में हुआ।  अपने शुरुआती क्लासेज आरके श्रीवास्तव ने अपने मातृभूमि बिक्रमगंज से पढ़ाना प्रारम्भ किया।आरके श्रीवास्तव ने अपने गांव के असहाय निर्धन सैकड़ो स्टूडेंट्स को निशुल्क शिक्षा देकर आईआईटी, एनआईटी , बीसीईसीई में सफलता दिलाया। आज ये सैकड़ो निर्धन स्टूडेंट्स अपने गरीबी को काफी पीछे छोड़ अपने सपने को पंख लगा रहे। आरके श्रीवास्तव के द्वारा "आर्थिक रूप से गरीबो की नही रुकेगी पढ़ाई अभियान" भी चलाया जाता है। इस अभियान के तहत आर्थिक रूप से गरीब स्टूडेंट्स को निःशुल्क शिक्षा के अलावा शिक्षा संबधी सारी सुविधाएं भी उपलब्ध कराया जाता है। सिर्फ 1 रुपया गुरु दक्षिणा लेकर गणित पढाते है ।  इसके अलावा प्रत्येक वर्ष 50 गरीब स्टूडेंट्स को आरके श्रीवास्तव अपनी माँ के हाथों निःशुल्क किताबे बंटवाते है।वर्तमान में बिहार के आरके श्रीवास्तव को देश के विभिन्न राज्यो के शैक्षणिक संस्थाए गेस्ट फैकल्टी के रूप में शिक्षा देने के लिए भी बुलाते है। आरके श्रीवास्तव  देहरादून,हरियाणा , दिल्ली सहित देश के अन्य  प्रतिष्टित संस्थानों में गेस्ट फैकल्टी के रूप में पढाकर उससे होने वाली आमदनी से ही बिहार के गरीब स्टूडेंट्स को निःशुल्क शिक्षा के अलावा शिक्षा संबंधी सारी सुविधाये देकर उनके सपने को पंख लगाते आ रहे है । वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव की प्रसिद्धि उनके जादुई तरीके से गणित पढ़ाने एवं सैकड़ो गरीब स्टूडेंट्स को निःशुल्क शिक्षा देकर इंजीनियर बनाने की अद्वितीय सफलता के लिए है।  आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली के खबरे बिहार सहित देश के सारे प्रतिष्टित अखबारों, न्यूज़ पोर्टल, पत्र- पत्रिकाएं में  हजारो बार छप चुके है।

आरके श्रीवास्तव का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था, । उनके पिता एक किसान थे, जब आरके श्रीवास्तव पांच वर्ष के थे तभी उनके पिता पारस  नाथ लाल इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। पिता के गुजरने के बाद आरके श्रीवास्तव की माँ ने इन्हें काफी गरीबी को झेलते हुए पाला पोषा। आरके श्रीवास्तव को हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में भर्ती कराया। उन्होंने अपनी शिक्षा के उपरांत गणित में अपनी गहरी रुचि विकसित की। जब आरके श्रीवास्तव बड़े हुए तो फिर उनपर दुखो का पहाड़ टूट गया, पिता की फर्ज निभाने वाले एकलौते बड़े भाई शिवकुमार श्रीवास्तव भी इस दुनिया को छोड़ कर चले गए। अब इसी उम्र में आरके श्रीवास्तव पर अपने तीन भतीजियों की शादी और भतीजे को पढ़ाने लिखाने सहित सारे परिवार की जिम्मेदारी आ गयी।

उन्होंने अपने शिक्षा के दौरान संख्या सिद्धांतों पर नोटस बनाए।
बिहार के आर के श्रीवास्तव का नाम 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' लंदन में दर्ज हो चुका है। वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स लंदन से सम्मानित होने के बाद आर के श्रीवास्तव ने एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि, वो सही मायने में 'मैथेमैटिक्स गुरु' हैं
आर के श्रीवास्तव का नाम 'वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' द्वारा प्रकाशित किताब में दर्ज किया गया है। किताब में यह जिक्र किया गया है कि आर के श्रीवास्तव ने पाइथागोरस थ्योरम को क्लासरूम प्रोग्राम में 52 अलग अलग तरीके से बिना रुके सिद्ध करके दिखाया है।

वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन के संरक्षक ब्रिटिश पार्लियामेंट के सांसद वीरेंद्र शर्मा ने आरके श्रीवास्तव को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड्स सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दिया।

प्रोफेसर  आरके श्रीवास्तव पढ़ाई के   उपरांत टीबी की बीमारी से ग्रसित होने के चलते इलाज के लिए अपने आईआईटी के तैयारी एवम प्रवेश परीक्षा को बीच मे छोड़कर  अपने मामा के यहाँ से अपने घर बिक्रमगंज आ गए।  गांव के डॉक्टर ने आरके श्रीवास्तव को नौ महीने दवा खाने और आराम करने की सलाह दिया। बीमारी के कारण आरके श्रीवास्तव का आईआईटियन बनने का सपना टूट गया। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा छूट गया। उस समय आरके श्रीवास्तव काफी दुखी हो चुके थे।ऐसे ही काफी दिन बीतते गए , घर पर आरके श्रीवास्तव बोर होने लगे। फिर इन्ही नौ महीनों के दौरान आरके श्रीवास्तव ने अपने घर बुलाकर अपने आस-पास के स्टूडेंट्स को  निःशुल्क पढ़ाने लगे।धीरे धीरे समय बीतते गए और ये कारवा आगे बढ़ते गया।  पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद आरके श्रीवास्तव ने यह ठान लिया कि जिस गरीबी के कारण हमें शिक्षा ग्रहण करने में काफी दिक्कत हुआ। वैसे बिहार सहित देश मे कितने स्टूडेंट्स होंगे जिसमे टैलेंट होने के वावजुद अपने गरीबी के कारण पढ़ नही पाते होंगे। फिर वही से अपने शैक्षणिक कार्यशैली की शरुआत शहर बिक्रमगंज के  निर्धन स्टूडेंट्स को पढ़ाना चालू किया था। जो आज देशव्यापी बन चुका है।आज पूरे देश के अलग अलग राज्यो में शिविर लगाकर आरके श्रीवास्तव मैथमेटिक्स का गुर सिखाते है। अपने आईआईटियन न बनने की सपने को जिद्द में बदलकर सैकड़ो गरीब स्टूडेंट्स को आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई सहित देश के प्रतिष्टित संस्था में पहुँचाकर उनके सपने को पंख लगाया।आरके श्रीवास्तव ने सब्जी विक्रेता, गरीब किसान , मजदूर के बच्चे को सफलता दिलाकर उनके सपने को पंख लगाया।

आरके श्रीवास्तव के द्वारा चलाया जा रहा वंडर किड्स प्रोग्राम भी इन दिनों बिहार सहित देश मे चर्चा का विषय बना हुआ है।
बिहार के एक छोटे से गांव विक्रमगंज के रहने वाले आरके श्रीवास्तव ने सैकड़ो गरीब असहाय बच्चों को मात्र 1 रुपय गुरु दक्षिणा में आईआईटी , एनआईटी , बीसीईसीई प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाकर इंजीनियर बनाया।
इससे पहले भी नाईट क्लास के लिए  200 क्लास से अधिक बार पूरे रात लगातार 12 घंटे निःशुल्क शिक्षा देने के कारण आरके श्रीवास्तव का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स,एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी दर्ज हो चुका है।

बिहार का मान सम्मान को विश्व पटल पर बढ़ाने वाले मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव है हजारो स्टूडेंट्स के रोल मॉडल । सैकड़ो गरीब प्रतिभाओ के सपने को आईआईटी,एनआईटी, एनडीए,बीसीईसीई में सफलता दिलाकर लगा चुके है पंख। अमेरिकी विवि डॉक्टरेट की मानद उपाधि से कर चुका है सम्मानित।

पिछले 10 वर्षों से गरीब बच्चो को गणित पढ़ा रहे है।

बिहार के युवा गणितज्ञ मैथमेटिक्स गुरु फेम आरके श्रीवास्तव के लिए शिक्षा कोई 'बजारू' चीज नही है। वे छात्रों का भविष्य सवारने और कोचिंग संस्थानों को करारा जवाब देने के लिए पिछले 10 वर्षो से निःशुल्क शिक्षा दे रहे है।
   आमतौर पर शिक्षा स्तर का गिरावट का सबसे बड़ा खामियाजा इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे तकनीकी विषयो की पढ़ाई करने वाले छात्र- छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। जिन्हें कोचिंग के लिए लाखों रुपये देने पड़ रहे है। पिछले कई वर्षो से आरके श्रीवास्तव ने शिविर लगाकर इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारो गरीब स्टूडेंट्स को नाईट क्लासेज प्रारूप के माध्यम से पूरे रात लगातार 12 घण्टे तक गणित के सवाल हल करने की नई -नई तकनीको और बारीकियों की जानकारी दे रहे।
  उनका दावा है कि इस शिविर में पढ़ाई करने वाले में से प्रत्येक वर्ष 60% से अधिक छात्र-छात्राएं आईआईटी, एनआईटी, बीसीईसीई ,एनडीए सहित तकनीकी प्रवेश परीक्षाओं में सफल होते है। छात्रों के इस नाईट क्लासेज शिविर की ओर आकर्षित होने के चलते हजारो स्टूडेंट्स के रोल मॉडल बन चुके है।  मैथमेटिक्स गुरु आरके श्रीवास्तव न सिर्फ बिहार में लोकप्रिय है बल्कि अपने गणित पढ़ाने के जादुई तरीके एवम गणितीय शोध के लिए प्रायः सुर्खियों में भी रहते है।
फिलहाल वह गरीब छात्रों को निःशुल्क शिक्षा देने में जुटे हुए है। उनके इस प्रयास से प्रभावित होकर अलग- अलग क्षेत्रों के उच्चे ओहदे के कुछ लोगो ने शिविर में अतिथि शिक्षक के बतौर छात्र- छात्राओ को पढ़ाया। बकौल आरके श्रीवास्तव कहते है की गणित की शिक्षा देना मेरा पेशा नही बल्कि शौक है, ब्यवसायिक शिक्षण में छात्र- छात्राओं और शिक्षकों के बीच परस्पर प्रेम और विश्वास का संबंध नही रह पाता।
आपको बताते चले कि आरके श्रीवास्तवा के नाईट क्लास के मॉडल को जानने और समझने के लिए  अभिभावक सहित शिक्षक भी उनके क्लास में बैठते है की कैसे आरके श्रीवास्तवा पूरे रात लगातार 12 घण्टे विद्यार्थियों को पूरे अनुसाशन के साथ मैथमेटिक्स का गुर सीखा रहे। सुबह क्लास खत्म होने के बाद  स्टूडेंट्स के माता पिता इस बात से काफी चकित थे की मेरा बेटा-बेटी घर पर एक घण्टे भी ठीक से पढ़ नही पाते उन्हें आरके श्रीवास्तव ने लगातार पूरे रात 12 घण्टे तक अनुसाशन के साथ बैठाकर मैथमेटिक्स का गुर सिखाया।  उन्हें सेल्फ स्टडी के प्रति प्रेरित किया गया कि कैसे आप पूरे रातभर पढ़ सकते है। आर के श्रीवास्तव के नाइट क्लास के रूप मे लगातार पूरे 12 घंटे बच्चों को शिक्षा देने के मुहिम अब देशव्यापी रूप लेने लगा है।आर के श्रीवास्तव को देश के विभिन्न राज्यों के शैक्षणिक संस्थाएँ गेस्ट फैक्लटी के रूप मे अपने यहाँ शिक्षा देने के लिए बुलाती है, आरके श्रीवास्तव बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही गणित में बहुत अधिक रुचि थी जो नौंवी और दसवी तक आते-आते परवान चढ़ी।
आर के श्रीवास्तवा की बचपन भी काफी गरीबी से गुजरा है।परन्तु अपने कड़ी मेहनत, उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आज देश मे मैथमेटिक्स गुरु के नाम से मशहूर है, वे कहते हैं कि मेरे जैसे देश के कई बच्चे होंगे जो पैसों के अभाव में पढ़ नहीं पाते।आरके श्रीवास्तवा अपने छात्रों में एक सवाल को अलग-अलग मेथड से हल करना भी सिखाते है,वे सवाल से नया सवाल पैदा करने की क्षमता का भी विकास करते है। आरके श्रीवास्तव ने फैसला लिया था कि गांव का कोई बच्चा पैसे के अभाव में पढ़ाई नहीं छोड़ेगा और उसे इंजीनियर बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया।आज उसी का नतीजा है कि आर के श्रीवास्तव देश ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में लोगों के बीच मैथेमैटिक्स गुरु के नाम से जाने जाते हैं।
तब किसे पता था कि अपनी छोटी से कुटिया में अपनी आर्थिक तंगी से त्रस्त आर के श्रीवास्तव ने पूरी लगन और निष्ठा से पढ़ाई कि और जब जिंदगी के मैदान में सफल हुए तो फैसला कर लिया कि अब गांव का कोई बच्चा पैसे के अभाव में पढ़ाई नहीं छोड़ेगा और उसे इंजीनियर बनाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया। आज उसी का नतीजा है कि आर के श्रीवास्तव देश ही नहीं दुनिया के कोने-कोने में लोगों के बीच मैथेमैटिक्स गुरु के नाम से जाने जाते हैं।

कहते हैं प्रतिभा किसी परिचय का मोहताज नहीं होती है। बस उसे जरुरत है वक्त रहते फलक पर उतरने की, आर के श्रीवास्तव अपनी कामयाबी का मूल मंत्र अपनी लगन और मेहनत  को मानते है , वे कहते है कि कड़ी  मेहनत ,उच्ची सोच, पक्का इरादा के बल पर आप सभी अपने लक्ष्य  को पा सकते है।

आपको बताते चलें कि बेहतर राष्ट्र निर्माण हेतु शिक्षा में निरंतर किये जा रहे कार्यो के लिए मैथमेटिक्स गुरु आर के श्रीवास्तवा को दर्जनो अवॉर्ड से सम्मानित हो चुके है , इसके अलावा वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी आरके श्रीवास्तव का नाम दर्ज है।
राष्ट्रपति  महामहिम रामनाथ कोविंद भी आरके श्रीवास्तव के शैक्षणिक कार्यशैली की प्रशंसा कर चुके है। मैथमेटिक्स गुरु के नाम से राष्ट्रपति ने आरके श्रीवास्तव को शैक्षणिक मीटिंग के दौरान संबोधित भी कर चुके है  ।