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Friday, December 27, 2019

सहरसा:31.5 लाख की नौकरी हासिल कर शाम्भवी ने किया शहर का नाम रौशन

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सहरसा। कहते हैं कि अगर इरादे बुलंद हो और लगन पक्की हो तो मंजिल पाना आसान हो जाता है। छोटे-छोटे शहरों के बच्चे भी न केवल बड़े सपने देख रहे हैं बल्कि उनको साकार करने के लिए ईमानदारी पूर्वक प्रयास भी कर रहे हैं। शहर के नया बाजार निवासी संवेदक उमेश जायसवाल की पुत्री शाम्भवी जायसवाल का सपना आइटी क्षेत्र में बड़े मुकाम हासिल करने का है और वे कहती है कि अब उनका सपना बड़ा आकार लेता दिखता नजर आ रहा है। एनआईटी जमशेदपुर से एमसीए कर रही शाम्भवी को आइटी क्षेत्र की विश्व प्रसिद्ध कंपनी अमेजॉन से 31.5 लाख सालाना पैकेज का ऑफर मिला है। शाम्भवी इस ऑफर को लेकर खुश है लेकिन शाम्भवी भविष्य में पीएचडी कर रिसर्च क्षेत्र में जाना चाहती है। अपने घर सहरसा आयी शाम्भवी ने बतायी कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा ट्यूशन ब्यूरो सहरसा से हुई। यहीं से दसवीं बोर्ड की परीक्षा पास की इसके बाद 12वीं जीजीपीएस बोकारो से उत्तीर्ण किया। इसके बाद प्रवेश परीक्षा पास कर बीआईटी मेसरा से बीसीए में ग्रेजुशन की। बचपन से ही मेधावी रही शाम्भवी ने कड़ी मेहनत के बल पर एनआइटी जमशेदपुर की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण किया और एमसीए में एडमिशन कराया। अपनी तैयारी के सिलसिले में वे कहती है कि बेहतर से बेहतर करने की जुनून में कभी-कभी छात्र दबाव में आ जाते हैं और फिर वे डिप्रेशन में चले जाते हैं। उनके मुताबिक यह दबाव उन पर भी था लेकिन उस दबाव से बाहर निकलने में वे कामयाब रही। एमसीए का आखिरी सेमेस्टर पूरा कर रही शाम्भवी को नोकिया सहित अन्य कई कंपनियों से भी अच्छे ऑफर मिले हैं लेकिन आखिरकार उन्होंने अमेजॉन में ही जाना तय किया है। वे कहती हैं कि शुरूआत अच्छी है इसीलिए इसे स्वीकार किया। वे कहती है कि आपको जिस काम में दिल लगे वहीं करना चाहिए और सफलता जरूर मिलेगी। शाम्भवी पैसे कमाकर अपने माता- पिता के सभी सपने को पूरा करना चाहती है। शाम्भवी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता- पिता एवं अपने गुरूजनों को देती है।

बच्चों पर करें भरोसा: उमेश
वर्ष 1996 में शहर के नया बाजार में जन्मी शाम्भवी के पिता उमेश जायसवाल पेशे से ठेकेदार है। शाम्भवी का बड़ा भाई सौरभ जायसवाल ने भी आइआईटीयन है और पढ़ाई पूरी करने के बाद गुडगांव में ओह माई लांड्री के नाम से खुद का स्टार्टअप शुरू किया है। बच्चों की सफलता पर नाज करते हुए उमेश जायसवाल कहते हैं कि उन्होंने हर हमेशा बच्चों को उनकी अपनी इच्छानुसार रास्ता चुनने की सलाह देते रहे। उनकी पढ़ाई करने के तरीकों पर भरोसा किया और कभी टोका नहीं। ऐसा करना जोखिम भरा था लेकिन हमें अपने बच्चों पर पूरा भरोसा था कि वे जरूर अच्छा करेंगे। पिता ने भावुक होते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई के दौरान ऐसा भी दिन आया जब बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़ा और बच्चे इस बात को जानते थे इसीलिए उनके मन में कुछ अच्छा करने की ललक रही होगी।
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लगन व मेहनत से मिली सफलता: मंजुला
शाम्भवी की माता मंजुला देवी गृहिणी है। इनकी माता कहती है कि शाम्भवी अपने खानदान में सबसे छोटी होने के कारण वह सबकी लाडली रही है। अधिक लाड़ व प्यार से बच्चे के बिगड़ने की अधिक संभावना रहती है लेकिन शाम्भवी ने अपने लक्ष्य को हर हमेशा केन्द्रित कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दी तो आज सफलता उसके कदम चूम रही है। मालूम हो कि शाम्भवी नया बाजार निवासी डॉ. अरूण कुमार जायसवाल की भतीजी है। इनकी सफलता पर उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इनकी सफलता पर हरीश जायसवाल सहित अन्य ने खुशी जाहिर की है।