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सहरसा। नगर परिषद के 39 वार्ड पार्षदों में से 22 पार्षदों ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को प्रमंडलीय आयुक्त से मिलकर पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर फर्जी एनजीओ को कार्य आवंटित कर भुगतान करने का आरोप लगाया है। जबकि कार्यपालक पदाधिकारी पर नवहट्टा के शिक्षक को सीधे नगर परिषद कार्यालय में प्रतिनियोजित करने और हाईकोर्ट से बर्खास्तकर्मी को काम पर रखने की बात कही है।
नगर परिषद के उप सभापति उमेश यादव, वार्ड पार्षद रेशमा शर्मा, रौशन आरा, लक्ष्मी देवी, सोनी महेन्द्र शर्मा, अरुण कुमार निराला, संतोष कुमार, वीरेन्द्र पासवान, सुशांत कुमार सुमन, रेखा देवी, कैलाश रजक, गौरव कुमार, कुमारी सिद्धि प्रिया, राजेश कुमार सिंह, निर्मला देवी, दिनेश यादव, कामिनी, खैरूल, रिकु देवी, डेजी भारती, वार्ड नंबर 36 के पार्षद और भारती झा ने हस्ताक्षरित ज्ञापन आयुक्त को सौंपा है
क्या की गई है शिकायत
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आवेदन में आरोप लगाया गया है कि कार्यपालक पदाधिकारी ने नियम कानून को ताक पर रखकर विभिन्न योजनाओं में एनजीओ जेएमडी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, सुपौल से मोटी रकम लेकर करोड़ों रुपये की सामग्री और डोर टू डोर कचरा उठाव का कार्य आवंटित कर दिया गया। जबकि एनजीओ पूरी तरह से फर्जी है और महज कागज पर चलता है। एनजीओ के पास साफ-सफाई का कोई उपकरण नहीं है। लेकिन प्रत्येक माह 50 से 60 लाख रुपये फर्जी एनजीओ को भुगतान किया जा रहा है। यही नहीं, एकरारनामा एक वर्ष की जगह तीन वर्ष कर दिया गया है। लेकिन बोर्ड की बैठक से कोई प्रस्ताव पारित नहीं कराया गया। आवेदन में कहा गया है कि एनयूएलएम के तहत सीओ के पद पर बिना विज्ञापन निकाले हाईकोर्ट से बर्खास्त कर्मी रविशंकर सिंहा को अवैध रूप से प्रतिनियुक्त कर लिया गया। इसके अलावा हटाए गये कर्मी मुरारीकांत मोती को सफाई कर्मचारी के रूप में फर्जी तरीके से रखकर मानचित्र व मोटेशन का कार्य कराया जा रहा है। जबकि इस मद में राजस्व राशि पांच वर्षों से जमा नहीं कराया गया है।
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पुराने सामग्री का किया गया प्रयोग
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आवेदन में कहा गया है कि नगर सरकार भवन तीन करोड़ की लागत से बन रहा है। जिस स्थान पर बनाया जा रहा है वहां पहले से टाउन हॉल का भवन था। उस टाउन हॉल की सामग्री को तोड़कर जो करीब 50 लाख का था उसका उपयोग नगर सरकार भवन बनाने में कर दिया गया। संवेदक ने पुराने ईंट से ही कुर्सी तक नये भवन का निर्माण किया। जबकि कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा रिवाइज स्टीमेट 50 लाख का बनवाया गया। कहा है कि कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में तीन बार ही बोर्ड की बैठक हुई। जबकि प्रत्येक माह बोर्ड की बैठक होनी है। सामग्री खरीद के लिए सशक्त कमेटी की भी बैठक नहीं की जा रही है। करोड़ों की सामग्री खरीद के लिए मनचाहे लोगों को कार्य आवंटित किया जाता है।
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नवहट्टा के शिक्षक का हुआ प्रतिनयोजन
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सरकार के आदेश का उल्लंघन करते हुए कार्यपालक पदाधिकारी ने नवहट्टा के चंद्रायाण उमवि में नियोजित शिक्षक कृष्णचंद को सीधे प्रधानाध्यापक को पत्र देकर नगर शिक्षक नियोजन हेतु प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। कहा है कि डोर टू डोर कचरा उठाव के लिए सभी लोगों को डस्टबीन भी नहीं दिया गया है। जबकि 30 रुपए का डस्टबिन 150 से 240 रुपए तक खरीदा गया। पार्षदों ने सभी मामलों की जांच कर कार्रवाई का आग्रह किया है।
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कहते हैं कार्यपालक पदाधिकारी
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इस बाबत नप कार्यपालक पदाधिकारी प्रभात रंजन झा ने कहा कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं। सफाई व्यवस्था व अन्य चीजें जनता देख रही है। एनजीओ की बहाली सहित अन्य कार्याें में पूरी पारदर्शिता बरती गयी है। इसकी जांच करवायी जा सकती है।
