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मां की ममत्व और हिम्मत की बदौलत बिहरा की पूजा आज अपनी जिन्दगी जी रही है। लगभग आठ वर्ष पूर्व एसिड अटैक की शिकार पूजा जीना नहीं चाहती थी। लेकिन अस्पताल के बेड से लेकर आज तक मां के उत्साहवर्धन के कारण उसकी जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। फरवरी 2012 की घटना को याद करते पूजा का रुह कांप उठती है।
पूजा का कहना है कि घटना के बाद वह जिंदगी से निराश हो चुकी थी। लेकिन इलाज से लेकर आज तक मां उसके साथ साये की तरह खड़ी रही। आज भी मायूस होने पर मां की आंचल व उसके उत्साहवर्धक शब्द जिंदगी जीने की प्रेरणा देती है। कई बार उसे लगा कि शायद जिंदगी बेकार हो गई है लेकिन मां ने हर बार उसे समझाया। मां एक सहेली और तारणहार बनकर अपनी पुत्री को समाज की धारा में जोड़कर नई ऊर्जा के साथ जिन्दगी की लड़ाई लड़ने में साथ दे रही है। आसपास के लोग भी इस घटना के बाद पूजा की मां की भूमिका को सराहे नहीं थकते।
पूजा का भी कहना है कि इस तरह के हादसे के बुरे वक्त में अभिभावक और उसमें भी मां के सहयोग ने जिंदगी जीने को विवश किया। पूजा कहती है कि मां है तो जीवन में सबकुछ है। इस दुखद घटना में पिता राजेन्द्र साह सहित भाई -बहन का प्यार और सहयोग काफी मिला है जिसके बदौलत आज उसे एक प्यार भरे जीवन जीने की तमन्ना जगने लगी है। घरवालों का कहना है कि इस दुखद घटना में समाज का सहयोग मिला है।
काफी सपना संजोये हुये है पूजा
एसिड अटैक के बाद जिन्दगी से जंग लड़ रही पूजा कई सपना संजोये हुये है। पूजा के मन में यह कसक है कि काश सरकार के सहायता से उसका बेहतर और समुचित ईलाज होता तो वह आज अन्य लड़कियों की तरह अपना जीवन गुजारती। पूजा चाहती है कि वह पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो। हादसे के वक्त आंठवी क्लास में पढ़ रही पूजा की पढ़ाई आज गरीबी और बेबसी कारण बाधित है।
परिवार के लोगों में जग रही है आस
पूजा के परिवार के लोगों में आज भी कई आशायें है। मां जानकी देवी एवं बड़े भाई विक्की साह तथा भाभी संगीता कुमारी बताती है कि गरीबी और बेबसी के कारण जितना इलाज होना चाहिए वह नहीं हो पाया है। घटना से लेकर आज तक उसका इलाज चल रहा है। सरकार के स्तर पर इलाज के लिए कुछ सहायता मिली थी लेकिन वह नाकाफी साबित हुआ। पूजा के पिता एवं भाई बिहरा बाजार स्थित अपने घर के आगे चाय-नाश्ता का दुकान चलाकर परिवार का भरन-पोषण कर रहे हैं। पूजा को जहां पांच भाई है वहीं तीन बहन भी है। पूजा का परिवार आज भी किसी उद्धारक का बाट जोह रहा है ताकि उसका पूर्ण इलाज हो सके और सारे अरमान पूरा हो सके
काफी सपना संजोये हुये है पूजा
एसिड अटैक के बाद जिन्दगी से जंग लड़ रही पूजा कई सपना संजोये हुये है। पूजा के मन में यह कसक है कि काश सरकार के सहायता से उसका बेहतर और समुचित ईलाज होता तो वह आज अन्य लड़कियों की तरह अपना जीवन गुजारती। पूजा चाहती है कि वह पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो। हादसे के वक्त आंठवी क्लास में पढ़ रही पूजा की पढ़ाई आज गरीबी और बेबसी कारण बाधित है।
परिवार के लोगों में जग रही है आस
पूजा के परिवार के लोगों में आज भी कई आशायें है। मां जानकी देवी एवं बड़े भाई विक्की साह तथा भाभी संगीता कुमारी बताती है कि गरीबी और बेबसी के कारण जितना इलाज होना चाहिए वह नहीं हो पाया है। घटना से लेकर आज तक उसका इलाज चल रहा है। सरकार के स्तर पर इलाज के लिए कुछ सहायता मिली थी लेकिन वह नाकाफी साबित हुआ। पूजा के पिता एवं भाई बिहरा बाजार स्थित अपने घर के आगे चाय-नाश्ता का दुकान चलाकर परिवार का भरन-पोषण कर रहे हैं। पूजा को जहां पांच भाई है वहीं तीन बहन भी है। पूजा का परिवार आज भी किसी उद्धारक का बाट जोह रहा है ताकि उसका पूर्ण इलाज हो सके और सारे अरमान पूरा हो सके
