कोशी लाइव:विकास तांती
सहरसा। मोबाइल बच्चों को फायदा पहुंचाने की बजाए नुकसान पहुंचा रही है। इससे बच्चे कई तरह के रोग के शिकार हो रहे हैं। चिकित्सक डा. शशिभूषण तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभाष ने बताया कि बच्चों के तेजी से विकसित हो रहे दिमाग पर मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में सीखने की क्षमता में बदलाव, ध्यान न लगना, भोजन ठीक से न करना, आंखें खराब होना, हायपर एक्टिविटी और स्वयं को अनुशासित व नियमित न रख पाने की अनगिनत समस्याएं पैदा होने लगती है। मोबाइल तकनीकी बच्चों की गतिविधियों को सीमित कर देती है जिससे उनका शारीरिक विकास पिछड़ सकता है। बच्चों में शारीरिक विकास सुस्त दिखता है जिससे उसकी शैक्षणिक क्षमताएं व योग्यताएं प्रभावित होती हैं। जिन बच्चों को मोबाइल उनके कमरे में उपयोग करने के लिए दी जाती हैं उनके मोटे होने की संभावना 30 प्रतिशत तक बढ जाती है तथा मोटे बच्चों में 30 प्रतिशत बच्चों को मधुमेह होने समेत अन्य खतरा रहता है। बताया कि मोबाइल को घंटों तक अपलक देखते रहने से आंखों का रेटिना प्रभावित होता है। जिससे ड्राय सिन्ड्रोम तथा मौसम परिवर्तन के दौरान आंखों मे जलन तथा पानी बहने की समस्या बढ़ जाती है।
सहरसा। मोबाइल बच्चों को फायदा पहुंचाने की बजाए नुकसान पहुंचा रही है। इससे बच्चे कई तरह के रोग के शिकार हो रहे हैं। चिकित्सक डा. शशिभूषण तथा नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रभाष ने बताया कि बच्चों के तेजी से विकसित हो रहे दिमाग पर मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बच्चों में सीखने की क्षमता में बदलाव, ध्यान न लगना, भोजन ठीक से न करना, आंखें खराब होना, हायपर एक्टिविटी और स्वयं को अनुशासित व नियमित न रख पाने की अनगिनत समस्याएं पैदा होने लगती है। मोबाइल तकनीकी बच्चों की गतिविधियों को सीमित कर देती है जिससे उनका शारीरिक विकास पिछड़ सकता है। बच्चों में शारीरिक विकास सुस्त दिखता है जिससे उसकी शैक्षणिक क्षमताएं व योग्यताएं प्रभावित होती हैं। जिन बच्चों को मोबाइल उनके कमरे में उपयोग करने के लिए दी जाती हैं उनके मोटे होने की संभावना 30 प्रतिशत तक बढ जाती है तथा मोटे बच्चों में 30 प्रतिशत बच्चों को मधुमेह होने समेत अन्य खतरा रहता है। बताया कि मोबाइल को घंटों तक अपलक देखते रहने से आंखों का रेटिना प्रभावित होता है। जिससे ड्राय सिन्ड्रोम तथा मौसम परिवर्तन के दौरान आंखों मे जलन तथा पानी बहने की समस्या बढ़ जाती है।
