सहरसा के संतोष की कर्नाटक में हत्या की पूरी कहानी: दोस्त की पत्नी से बातचीत को लेकर था विवाद, रील बनाने के बहाने पहाड़ी पर ले जाकर घोंटा गला
सहरसा। बिहार के सहरसा नगर निगम क्षेत्र के धमसैनी वार्ड नंबर 46 निवासी 26 वर्षीय संतोष कुमार की कर्नाटक के कोप्पल में हुई हत्या के मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। परिवार ने संतोष के दोस्त मनीष यादव पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं, इस मामले में सामने आए राजकिशोर यादव के कथित बयान के अनुसार, 20 अक्टूबर की शाम संतोष को रील बनाने के बहाने कंपनी के पास एक पहाड़ी पर ले जाया गया था। वहां शराब पार्टी के बाद गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को झाड़ियों के पास फेंक दिया गया।
संतोष का शव 31 अक्टूबर को एंबुलेंस से सहरसा स्थित उनके घर पहुंचा था। परिवार में पत्नी लक्ष्मी देवी, दो बेटे और एक बेटी हैं। संतोष चार भाइयों में सबसे छोटे थे।
गांव में ठेला लगाना चाहते थे संतोष, पत्नी ने दोबारा भेजा कर्नाटक
संतोष के बड़े भाई रंजीत ठाकुर के मुताबिक, संतोष की मनीष यादव और राजकिशोर यादव से दोस्ती थी। करीब डेढ़ से दो साल पहले मनीष उन्हें मजदूरी कराने के लिए कर्नाटक की एक कंपनी में ले गया था। वहां काम करने के बाद संतोष सितंबर 2026 में अपने गांव लौट आए थे।
गांव लौटने के बाद संतोष चाउमीन और बर्गर का ठेला लगाकर अपना रोजगार शुरू करना चाहते थे। लेकिन परिवार पर कर्ज अधिक होने के कारण पत्नी लक्ष्मी देवी चाहती थीं कि वह दोबारा कर्नाटक जाकर कमाई करें। मनीष भी उसी कंपनी में काम करता था, जहां संतोष पहले मजदूरी कर चुके थे।
परिवार के अनुसार, संतोष और मनीष की दोस्ती के कारण उसका घर पर भी आना-जाना था। इसी दौरान मनीष और लक्ष्मी के बीच फोन पर बातचीत होने लगी।
9 अक्टूबर को कर्नाटक गए, 20 अक्टूबर के बाद बंद हुआ संपर्क
परिजनों के मुताबिक, संतोष 9 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के कोप्पल स्थित कंपनी में काम करने के लिए गए थे। 19 अक्टूबर तक उनकी परिवार के लोगों से फोन पर बातचीत होती रही। इसके बाद 20 अक्टूबर से उनका मोबाइल बंद हो गया और परिवार का संपर्क टूट गया।
संतोष के बड़े भाई गौतम ने उनकी तलाश शुरू की। इंटरनेट और परिचितों की मदद से मोबाइल लोकेशन का पता लगाया गया। परिवार को जानकारी मिली कि संतोष की आखिरी लोकेशन 20 अक्टूबर को कर्नाटक के कोप्पल में थी।
इसके बाद परिजनों ने कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास से संपर्क किया। सुपरवाइजर ने बताया कि संतोष पिछले पांच दिनों से काम पर नहीं आ रहे थे। परिवार ने उनके साथ रहने वाले लोगों से पूछताछ करने का आग्रह किया।
राजकिशोर ने पूछताछ में बताई हत्या की कहानी
परिवार के अनुसार, कंपनी के सुपरवाइजर अमिताभ दास ने संतोष के साथ रहने वाले मनीष और राजकिशोर से पूछताछ की। इस दौरान मनीष वहां से फरार हो गया, जबकि राजकिशोर से पूछताछ की गई।
बताया गया है कि राजकिशोर ने सुपरवाइजर को बताया कि संतोष और मनीष के बीच लक्ष्मी देवी से बातचीत को लेकर विवाद होता था। मनीष को संतोष का इस बातचीत पर आपत्ति जताना पसंद नहीं था। इसी बात को लेकर मनीष ने संतोष की हत्या की योजना बनाई और राजकिशोर को भी इसमें शामिल किया।
राजकिशोर के कथित बयान के मुताबिक, 20 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे मनीष और वह संतोष को कंपनी के पास स्थित पहाड़ी पर ले गए थे। मनीष अपने साथ शराब की बोतल लेकर आया था। तीनों ने वहां शराब पी। इसके बाद मनीष ने संतोष से रील बनाने के लिए पोज देने को कहा।
बताया गया कि संतोष ने गले में गमछा डालकर रील बनाने के लिए पोज दिया। इसी दौरान मनीष ने गमछे से उसका गला घोंटना शुरू कर दिया। राजकिशोर के कथित बयान के अनुसार, उसने संतोष के दोनों हाथ पकड़ रखे थे। गला घोंटने से संतोष की मौत हो गई।
पहचान छिपाने के लिए सिर पर पत्थर से किया वार
राजकिशोर के कथित बयान के अनुसार, संतोष की हत्या के बाद मनीष ने उसके सिर के पीछे पत्थर से वार किया। इसके बाद दोनों ने शव को पास के गड्ढे में डाल दिया और वहां से चले गए।
राजकिशोर ने बताया कि मनीष ने उसे घटना के बारे में किसी को कुछ भी बताने से मना किया था। साथ ही खुलासा करने पर उसकी भी हत्या करने की धमकी दी थी। इसी डर से वह चुप रहा।
बाद में कंपनी के सुपरवाइजर को जानकारी मिलने पर पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद कोप्पल ग्रामीण थाना पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की।
पत्नी ने कहा- मनीष देता था संतोष की हत्या करने की धमकी
संतोष की पत्नी लक्ष्मी देवी ने मनीष पर एकतरफा प्यार करने और लगातार फोन कर बातचीत का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। लक्ष्मी के मुताबिक, मनीष अक्सर उन्हें फोन करता था। वह कहता था कि उनसे बात करके उसका मन खुश रहता है।
लक्ष्मी का दावा है कि मनीष ने कई बार धमकी दी थी कि अगर उन्होंने उससे बातचीत बंद की तो वह संतोष की हत्या कर देगा। उन्होंने बताया कि संतोष को मनीष का उनसे बात करना पसंद नहीं था, लेकिन मनीष के दबाव के कारण बातचीत होती थी।
लक्ष्मी ने यह भी स्वीकार किया कि घर पर कर्ज होने के कारण उन्होंने ही संतोष को दोबारा कर्नाटक जाकर काम करने के लिए कहा था। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि वहां उनके पति की हत्या कर दी जाएगी।
घर छोड़ने की घटना पर पत्नी और बड़े भाई के अलग-अलग बयान
लक्ष्मी देवी के मुताबिक, 2 अक्टूबर को वह घर छोड़कर चली गई थीं और 7 अक्टूबर को वापस लौटी थीं। उनका कहना है कि संतोष ने उनके साथ मारपीट की थी, जिसके बाद वह नाराज होकर घर से चली गई थीं। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पर रात बिताई थी।
वहीं, संतोष के बड़े भाई रंजीत ठाकुर का आरोप है कि उस समय मनीष गांव में ही था और लक्ष्मी उसके साथ घर से गई थीं। रंजीत के अनुसार, लक्ष्मी 7 अक्टूबर को वापस लौटी थीं। इस घटना को लेकर पत्नी और मृतक के बड़े भाई के बयान अलग-अलग हैं।
31 अक्टूबर को सहरसा पहुंचा शव, बेटे ने दी मुखाग्नि
संतोष की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार के सदस्य 27 अक्टूबर को कर्नाटक के लिए रवाना हुए थे। वहां से 31 अक्टूबर को उनका शव एंबुलेंस के जरिए सड़क मार्ग से सहरसा लाया गया। शव घर पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। संतोष के नौ वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।
कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई, कई लोगों से पूछताछ
कोप्पल ग्रामीण थाना पुलिस के एसएचओ बिरेश कुमार के अनुसार, मामले में राजकिशोर यादव को गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा राकेश यादव, राजेश यादव, रोहित यादव समेत अन्य युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी। पुलिस हत्या में शामिल अन्य लोगों और घटना की पूरी साजिश की जांच कर रही है।
इस मामले में 2 नवंबर को सामने आई एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी मनीष कुमार ने सोमवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में उसकी गिरफ्तारी की स्थिति को लेकर विरोधाभासी जानकारी सामने आई है।
फिलहाल संतोष की हत्या के पीछे की पूरी साजिश, आरोपियों की भूमिका और परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।