भारत संतों, त्याग, तपस्या और आध्यात्मिकता का देश: रामबालक दास जी महाराज
नवरात्रि पर कमलपुर गांव में सात दिवसीय सत्संग का आयोजन, मां दुर्गा के स्वरूपों की महिमा सुनने उमड़े श्रद्धालु
कोशी लाइव | मधेपुरा से पप्पू मेहता की रिपोर्ट
मधेपुरा। भारत संतों, त्याग, तपस्या और आध्यात्मिकता की भूमि है। यहां के कण-कण में धर्म, भक्ति और नैतिक मूल्यों का महत्व समाहित है। भारतीय संतों ने हमेशा समाज को प्रेम, भाईचारे, मानवता और सद्भाव का संदेश दिया है। यह बातें अंतरराष्ट्रीय संत रामबालक दास जी महाराज ने कहीं।
वे सोमवार को नवरात्रि के अवसर पर मधेपुरा जिले के घैलाढ़ प्रखंड अंतर्गत श्रीनगर पंचायत के कमलपुर गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय सत्संग कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उनके प्रवचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
संतों ने समाज को दिया प्रेम और मानवता का संदेश
अपने ओजस्वी प्रवचन में रामबालक दास जी महाराज ने कहा कि भारत की पावन धरती पर समय-समय पर अनेक महान संतों, महापुरुषों और समाज को दिशा देने वाली विभूतियों ने जन्म लिया। आदि शंकराचार्य, तुलसीदास, सूरदास और स्वामी विवेकानंद जैसी महान विभूतियों ने अपने विचारों और कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। वहीं, वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भी अपने अदम्य साहस और त्याग से देश का गौरव बढ़ाया।
उन्होंने कहा कि महान संतों और महापुरुषों ने समाज को जाति-पाति, ऊंच-नीच, भेदभाव और पाखंड से ऊपर उठकर जीवन जीने की प्रेरणा दी। उनके संदेशों का मूल उद्देश्य समाज में प्रेम, भाईचारा, समानता और मानवता की भावना को मजबूत करना रहा है।
महाराज ने कहा कि भारतीय संतों ने कभी भौतिक सुख-सुविधाओं को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य नहीं माना। उनका जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और परोपकार की भावना से प्रेरित रहा। ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोग रहें और सभी का कल्याण हो, यही भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का मूल संदेश है।
मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की महिमा का किया वर्णन
सत्संग के दौरान रामबालक दास जी महाराज ने मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों, उनकी महिमा और नवरात्रि के धार्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्रद्धालुओं को भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के साथ माता की आराधना करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों और सत्संग के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करते हैं और लोगों को सदाचार, सेवा तथा धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
सत्संग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गांव में भक्तिमय माहौल
नवरात्रि के अवसर पर कमलपुर गांव स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय सत्संग को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और अन्य श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं। भजन, पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों से गांव का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेले का भी आयोजन किया गया है। मेले में लोगों की आवाजाही से उत्सव का माहौल बना हुआ है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और माता से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी जाती हैं मन्नतें
आयोजकों ने बताया कि कमलपुर गांव स्थित इस दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता से प्रार्थना करते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई आराधना से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
नवरात्रि के इस पावन अवसर पर आयोजित सत्संग और मेले ने कमलपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक उत्साह बढ़ा दिया है। सात दिवसीय सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान, भक्ति और मानवता का संदेश दिया जा रहा है।