सुपौल में विकास राशि की निकासी में गड़बड़ी के आरोप में HM निलंबित, कैशबुक और MDM रिकॉर्ड में मिली खामियां
डीएम सावन कुमार के निर्देश पर कार्रवाई, रंग-रोगन कराए बिना राशि निकालने का आरोप; प्रधानाध्यापक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू
सुपौल। बिहार के सुपौल जिले में सरकारी विद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं और शैक्षणिक कार्यों में लापरवाही के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। प्रतापगंज प्रखंड स्थित उर्दू मध्य विद्यालय सूर्यापुर के प्रधानाध्यापक शोभाकांत देव को विभिन्न अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की स्थापना शाखा ने निलंबन का आदेश जारी किया है। प्रधानाध्यापक को विभागीय कार्यवाही के अधीन भी किया गया है।
प्रधानाध्यापक पर विद्यालय की विकास राशि की निकासी में अनियमितता, कैशबुक प्रस्तुत नहीं करने और मध्याह्न भोजन (MDM) से संबंधित अभिलेखों में खामियां पाए जाने के आरोप हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई प्रखंड विकास पदाधिकारी की औचक निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
औचक निरीक्षण में सामने आईं कई अनियमितताएं
जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, प्रतापगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) ने 30 सितंबर 2026 को सुबह 11:45 बजे उर्दू मध्य विद्यालय सूर्यापुर का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर बीडीओ ने 1 अक्टूबर 2026 को पत्रांक 865 के माध्यम से अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी थी।
रिपोर्ट में विद्यालय के प्रधानाध्यापक की कार्यशैली को असंतोषजनक बताया गया। निरीक्षण के दौरान वित्तीय अभिलेखों और मध्याह्न भोजन से संबंधित रिकॉर्ड में कई कमियां सामने आईं। इसके बाद मामले को गंभीर मानते हुए प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
रंग-रोगन कराए बिना विकास राशि निकालने का आरोप
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में विद्यालय को विकास मद में राशि आवंटित की गई थी। आरोप है कि विद्यालय में रंग-रोगन का काम कराए बिना ही उससे संबंधित अभिलेख तैयार कर लिए गए और राशि की निकासी कर ली गई।
निरीक्षण के दौरान प्रधानाध्यापक कैशबुक भी प्रस्तुत नहीं कर सके। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि विद्यालय के अभिलेख उनके घर पर रखे हुए हैं। सरकारी विद्यालय की राशि के खर्च और उससे संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन में यह एक महत्वपूर्ण कमी मानी गई।
विकास मद की राशि का उपयोग किस कार्य में और किस प्रक्रिया के तहत किया गया, इसकी जांच के लिए संबंधित अभिलेख महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई की गई है।
मध्याह्न भोजन के रिकॉर्ड में भी मिली गड़बड़ी
विद्यालय में संचालित मध्याह्न भोजन योजना के रिकॉर्ड की जांच के दौरान भी खामियां सामने आईं। निरीक्षण के दिन मध्याह्न भोजन की उपस्थिति पंजी में छात्रों की संख्या दर्ज नहीं मिली।
इसके अलावा, मध्याह्न भोजन से संबंधित कैशबुक की जांच में वर्ष 2020 से विद्यालय शिक्षा समिति के सचिव के हस्ताक्षर नहीं पाए गए। रिपोर्ट में इन कमियों को गंभीर अनियमितता के रूप में दर्ज किया गया।
सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत छात्रों की उपस्थिति, भोजन से संबंधित खर्च और वित्तीय लेनदेन का रिकॉर्ड रखना आवश्यक होता है। ऐसे में अभिलेखों में खामियां मिलने से योजना के संचालन और खर्च की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
डीएम के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई
औचक निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले में कार्रवाई की। जिलाधिकारी सावन कुमार के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की स्थापना शाखा ने प्रधानाध्यापक शोभाकांत देव के निलंबन का आदेश जारी किया।
आदेश में बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम-9 का उल्लेख किया गया है। प्रधानाध्यापक को निलंबित करने के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही भी शुरू की गई है।
निलंबन अवधि में त्रिवेणीगंज रहेगा मुख्यालय
जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान शोभाकांत देव का मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, त्रिवेणीगंज का कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें निलंबन अवधि में निर्धारित मुख्यालय से संबंधित नियमों का पालन करना होगा।
आदेश में यह भी कहा गया है कि प्रधानाध्यापक के खिलाफ आरोपपत्र अलग से जारी किया जाएगा। इसके बाद विभागीय कार्यवाही के तहत आरोपों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच की जाएगी।
विभागीय जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
उर्दू मध्य विद्यालय सूर्यापुर में विकास राशि, कैशबुक और मध्याह्न भोजन से संबंधित रिकॉर्ड में खामियां मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की है। हालांकि, प्रधानाध्यापक पर लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच विभागीय कार्यवाही के दौरान की जाएगी।
जांच में संबंधित वित्तीय अभिलेखों, खर्च के विवरण और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकारी विद्यालयों में वित्तीय अनियमितताओं और अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है।