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Monday, October 5, 2026

बिहार में फर्जी B.Ed. प्रमाण पत्र पर 11 साल से नौकरी कर रहा शिक्षक गिरफ्तार, निगरानी जांच में खुलासा

जमुई में फर्जी B.Ed. प्रमाण पत्र पर 11 साल से नौकरी कर रहा शिक्षक गिरफ्तार, निगरानी जांच में खुलासा

जमुई। खैरा प्रखंड के बाघाखांड विद्यालय में करीब 11 वर्षों से शिक्षक के रूप में कार्यरत हरेराम कुमार को पुलिस ने फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के मामले में गिरफ्तार किया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में उसके B.Ed. प्रमाण पत्र के फर्जी पाए जाने के बाद उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

2015 में श्रवण विकलांग कोटे से हुआ था नियोजन

निगरानी विभाग के अनुसार, शेखपुरा जिले के भदौस गांव निवासी हरेराम कुमार ने वर्ष 2015 में बिहार राज्य जिला परिषद माध्यमिक शिक्षक नियोजन के लिए जमुई में आवेदन किया था। उसका नियोजन श्रवण विकलांग कोटे में हुआ था। इसके बाद उसे बाघाखांड विद्यालय में गणित विषय के प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की B.Ed. डिग्री पर उठे सवाल

नियोजन के दौरान हरेराम कुमार ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी से जारी B.Ed. का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। दस्तावेजों की जांच के दौरान निगरानी विभाग ने प्रमाण पत्र को सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय भेजा। विश्वविद्यालय से सत्यापन के बाद संबंधित B.Ed. प्रमाण पत्र के फर्जी होने की जानकारी विभाग को मिली।

फर्जी दस्तावेज के आधार पर नौकरी लेने का आरोप

निगरानी विभाग का आरोप है कि हरेराम कुमार ने फर्जी अंक पत्र और प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें वास्तविक दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक नियोजन में अनुचित लाभ लेकर वह वर्षों तक सरकारी शिक्षक के पद पर कार्य करता रहा।

त्यागपत्र का अवसर मिलने के बावजूद नहीं छोड़ी नौकरी

निगरानी विभाग के मुताबिक, फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को हाईकोर्ट के निर्देश के तहत एमनेस्टी पीरियड में त्यागपत्र देने का अवसर दिया गया था। हरेराम कुमार ने इस अवधि में भी इस्तीफा नहीं दिया। इसके बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना की ओर से उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

कूटरचना और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज

मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक सह सहायक जांचकर्ता विकास कुमार श्रीवास्तव ने प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें हरेराम कुमार समेत अन्य अज्ञात लोगों पर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरेराम कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। मामले में जांच जारी है और दस्तावेज तैयार करने या फर्जी प्रमाण पत्र के इस्तेमाल में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।