मधेपुरा बिजली विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, आयांश जन कल्याण फाउंडेशन ने तीसरी बार भेजा शपथ पत्र
कोशी लाइव | मधेपुरा से पप्पू मेहता की रिपोर्ट
मधेपुरा: विद्युत आपूर्ति प्रमंडल मधेपुरा में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आयांश जन कल्याण फाउंडेशन ने एक बार फिर नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL), पटना के अवर सचिव शैलेंद्र झा को शपथ पत्र भेजा है। संस्था का दावा है कि विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को प्रमाणित करने के लिए यह तीसरी बार शपथ पत्र उपलब्ध कराया गया है।
संस्था के संस्थापक बरुण कुमार मेहता ने आरोप लगाया कि विद्युत आपूर्ति प्रमंडल मधेपुरा में कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार के योगदान के बाद से कथित तौर पर भ्रष्टाचार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभाग के वरीय अधिकारियों, विद्युत अधीक्षण अभियंता सहरसा, NBPDCL पटना के निदेशक और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को कई बार पत्र और ई-मेल के माध्यम से शिकायत दी गई है।
दो मामलों में पहले भी मांगा गया था शपथ पत्र
बरुण कुमार मेहता के अनुसार, सैकड़ों शिकायतों में से दो मामलों पर अवर सचिव शैलेंद्र झा ने संज्ञान लिया था। अगस्त और अक्टूबर 2025 में उनसे कथित भ्रष्टाचार को प्रमाणित करने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी से निर्गत शपथ पत्र और लिखित संपुष्टि पत्र मांगा गया था। संस्था का कहना है कि दोनों अवसरों पर मांगे गए दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए गए।
हालांकि, संस्था के अनुसार इन शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं मिली है।
तीसरी बार भी समय पर उपलब्ध कराया शपथ पत्र
संस्था ने बताया कि एक अन्य मामले में संज्ञान लेते हुए अवर सचिव की ओर से फिर शपथ पत्र की मांग की गई। इसके बाद संस्था की ओर से तीसरी बार शपथ पत्र उपलब्ध कराया गया है।
इसकी जानकारी NBPDCL पटना, पब्लिक ग्रीवांस सेल पटना, मुख्य सचिव बिहार और मुख्यमंत्री कार्यालय को भी दी गई है। संस्था ने विद्युत आपूर्ति प्रमंडल मधेपुरा में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
साक्ष्य मांगने पर उपलब्ध कराने का दावा
बरुण कुमार मेहता ने कहा कि यदि किसी वरीय अधिकारी को कथित भ्रष्टाचार से संबंधित साक्ष्यों की आवश्यकता है तो लिखित रूप से मांग किए जाने पर संस्था की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। उनका कहना है कि दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले पदाधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, विद्युत विभाग के संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में सामने नहीं आया है। संस्था द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।