मोतिहारी। सरकारी दफ्तरों में आवेदन लेकर भटकने और महीनों तक काम के इंतजार का दौर खत्म करने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को मोतिहारी की धरती से सहयोग पोर्टल की जवाबदेही व्यवस्था का एलान करते हुए साफ कहा कि अब जनता के काम में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।उन्होंने कहा कि सहयोग पोर्टल या सहयोग शिविर में आवेदन करने के बाद 10 दिन में काम नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री कार्यालय से पहला नोटिस, 20वें दिन दूसरा और 25वें दिन फिर नोटिस जाएगा। 30 दिन पूरे होते ही संबंधित पदाधिकारी खुद सस्पेंड हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरा सिस्टम एआई आधारित होगा। आवेदन की स्थिति से लेकर कार्रवाई तक की निगरानी हो रही है। उन्होंने कहा कि अब किसी व्यक्ति को अपनी समस्या लेकर किसी कार्यालय के चक्कर लगाने या किसी अधिकारी के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। सीधे सहयोग पोर्टल या सहयोग शिविर में आवेदन करना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के हर व्यक्ति को न्याय दिलाना है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना भी तभी पूरा होगा, जब आम लोगों को समय पर न्याय मिलेगा। गरीबों की चिंता सरकार की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से कई बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं।
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के बिहार में स्थापना का हो रहा प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के नए कैंपस की स्थापना को केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है। इसके लिए बिहार सरकार उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराएगी और भवन निर्माण की स्वीकृत लागत का 50 प्रतिशत राज्यांश वहन करेगी। इससे राज्य के युवा कलाकारों को पेशेवर नाट्य प्रशिक्षण, स्टेजक्राफ्ट और उन्नत शोध के अवसर राज्य में ही मिल सकेंगे।एक महीने में 35 लाख राशन कार्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एक करोड़ गरीब लोगों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। एक महीने में ही 35 लाख लोगों को राशन कार्ड दिए जा चुके हैं।
गरीबों को आवास उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और एनडीए सरकार के कार्यकाल में बिहार के गरीबों को 50 लाख से अधिक पक्के मकान दिए गए हैं। अगले पांच वर्षों में 60 लाख और पक्के मकान देने का लक्ष्य है।
पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरी व रोजगार
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योग खड़े करने के साथ सरकारी नौकरियों के अवसर बढ़ाए जाएंगे। अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अब तक करीब 12 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और 40 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने का काम किया गया है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार तभी बदलेगा, जब गांव की महिलाएं रोजगार से जुड़ेंगी।
मुख्यमंत्री महिला योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को जोड़ा गया है। मछली पालन, पशुपालन, बकरी पालन और डेयरी को रोजगार का माध्यम बनाया जाएगा। हर पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र खोलने की दिशा में काम होगा। बकरी पालन के लिए महिलाओं को स्टार्टअप से जोड़ा जाएगा और दो लाख रुपये तक की सहायता देने की बात कही।
जेईई-नीट के लिए बिहार में 700 केंद्र
शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के 700 स्कूलों को माडल स्कूल बनाया गया है। बच्चों को जेईई और नीट की तैयारी के लिए कोटा जाने की मजबूरी खत्म करने की दिशा में काम हो रहा है। पूरे बिहार में 700 केंद्र बनाए गए हैं, जहां जेईई-नीट की तैयारी शुरू हो चुकी है। रात 11 बजे भी बच्चे शिक्षक की मांग करेंगे तो उन्हें ऑनलाइन शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बिहार का कोई प्रखंड अब डिग्री कालेज से वंचित नहीं है। पीएचडी में छात्राओं को चार वर्षों तक मुख्यमंत्री फेलोशिप के रूप दस हजार प्रतिमाह देने की योजना है।
44 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में 44 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित की जा चुकी है। उत्तर बिहार में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। पशु सखी की योजना पर भी काम होगा। उन्होंने कहा कि कोई पंचायत सुधा बिक्री केंद्र से वंचित नहीं रहेगी।