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Tuesday, September 8, 2026

BIHAR:DTO ऑफिस में 15 हजार की रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार, ट्रैक्टर का नाम ट्रांसफर कराने के बदले मांगे थे पैसे

शेखपुरा DTO ऑफिस में 15 हजार की रिश्वत लेते क्लर्क गिरफ्तार, ट्रैक्टर का नाम ट्रांसफर कराने के बदले मांगे थे पैसे

शेखपुरा। जिले के परिवहन कार्यालय में निगरानी विभाग ने मंगलवार को रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निम्न वर्गीय लिपिक कुणाल कुमार को 15 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। निगरानी की टीम ने यह कार्रवाई शाम करीब चार बजे परिवहन कार्यालय में की।

गिरफ्तारी के बाद निगरानी अधिकारी कुणाल कुमार को अपने साथ पटना स्थित मुख्यालय ले गए। कार्रवाई की खबर फैलते ही परिवहन कार्यालय से लेकर समाहरणालय परिसर तक हड़कंप मच गया।

ट्रैक्टर के कागजात में नाम बदलने के लिए मांगे पैसे

निगरानी के वरीय पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र प्रसाद के अनुसार, ट्रैक्टर के निबंधन में नाम ट्रांसफर कराने के बदले लिपिक द्वारा 15 हजार रुपये की मांग की गई थी।

इस संबंध में अरियरी प्रखंड के डीहा गांव निवासी राजू प्रसाद ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि ट्रैक्टर का नाम ट्रांसफर कराने के लिए वह परिवहन कार्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन उसे लगातार टाल-मटोल किया जा रहा था। बाद में कथित तौर पर काम कराने के एवज में 15 हजार रुपये की मांग की गई।

शिकायत का सत्यापन, फिर बिछाया गया ट्रैप

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने आरोपों की जांच शुरू की। टीम ने शिकायत से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया। सत्यापन के बाद आरोप सही पाए जाने पर लिपिक को पकड़ने के लिए ट्रैप की योजना बनाई गई।

मंगलवार को निगरानी टीम तय योजना के तहत परिवहन कार्यालय पहुंची। करीब शाम चार बजे जैसे ही कुणाल कुमार ने कथित रूप से 15 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

दो महीने पहले ही हुई थी पोस्टिंग

गिरफ्तार लिपिक कुणाल कुमार शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के सर्व गांव का रहने वाला बताया गया है। जानकारी के अनुसार, उसने करीब दो महीने पहले ही शेखपुरा परिवहन कार्यालय में योगदान दिया था।

कम समय में ही रिश्वत के मामले में निगरानी की कार्रवाई होने से कार्यालय के कर्मचारियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई।

पटना मुख्यालय ले गई निगरानी टीम

गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम कुणाल कुमार को अपने साथ पटना मुख्यालय ले गई, जहां उससे पूछताछ और मामले से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया की जा रही है।

निगरानी की इस कार्रवाई के बाद परिवहन कार्यालय के साथ-साथ पूरे समाहरणालय परिसर में दिनभर इस घटना को लेकर चर्चा होती रही।