बक्सर में छात्राओं से छेड़खानी मामले में 2 शिक्षक बर्खास्त: विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित, सरकारी नौकरी के लिए भी अयोग्य
बक्सर/डुमरांव। बक्सर के डुमरांव प्रखंड के नथुनी अहिर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार, आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने और ऑडियो के जरिए धमकी देने के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद दो शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्तगी के बाद दोनों शिक्षक भविष्य में किसी सरकारी नौकरी के लिए भी अयोग्य हो गए हैं।
बर्खास्त किए गए शिक्षकों में सहायक शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद और विद्यालय अध्यापक अरविंद कुमार शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें 2 सितंबर 2026 को निलंबित किया था। इसके अगले दिन 3 सितंबर को आरोप पत्र गठित कर विभागीय जांच शुरू की गई।
विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित
डुमरांव के प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। जांच में छात्राओं से कथित दुर्व्यवहार, छेड़खानी, आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने और ऑडियो के माध्यम से धमकी देने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई।
विभागीय जांच पूरी होने के बाद आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद अनुशासनिक प्राधिकार ने पूरे मामले की समीक्षा की और 21 सितंबर को दोनों शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।
यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के नियम 14 (XI) के तहत की गई है।
POCSO एक्ट में भी दर्ज है मामला
मामला सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए बक्सर के डीएम और एसपी को आरोपित शिक्षकों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी के बाद मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने का निर्देश दिया था।
शिक्षा मंत्री ने कहा था कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों से दुर्व्यवहार की शिकायतों की गंभीरता से जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है आरोपियों की गिरफ्तारी
मामले में पुलिस ने इससे पहले आरोपी शिक्षक अरविंद कुमार समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, मामले में आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उसे वायरल करने से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस ने यह भी बताया था कि एक अन्य आरोपी शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। पुलिस की छापेमारी के दौरान उसे 6 सितंबर को बक्सर स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया था।
मामले में स्कूल के प्रिंसिपल मो. इमाम अली अंसारी की भी गिरफ्तारी हुई थी। उन पर घटना की जानकारी होने के बावजूद मामले को दबाने का आरोप लगाया गया था।
29 अगस्त को स्कूल पहुंचकर की गई थी शिकायत
बताया गया कि आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद 29 अगस्त 2026 को ग्रामीण स्कूल पहुंचे थे। ग्रामीणों ने प्रिंसिपल से संबंधित शिक्षकों के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप है कि उस समय मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद पीड़ित छात्रा अपनी मां के साथ थाने पहुंची और शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट समेत अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
छात्रा के बयान के आधार पर जांच
पुलिस को दिए बयान में छात्रा ने आरोप लगाया था कि शिक्षक अरविंद कुमार छात्राओं को फोन कर अपने पास बुलाते थे। आरोप है कि इसी दौरान उसे भी होटल ले जाया गया और उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए तथा आपत्तिजनक वीडियो बनाया गया।
मामले की जांच में मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना गया है। बरामद मोबाइल की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और पुलिस जांच में मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा रिकॉर्ड की भी जांच
गंभीर आरोपों के बाद शिक्षा विभाग दोनों शिक्षकों की नियुक्ति, तबादले और सेवा रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, अरविंद कुमार की नियुक्ति BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-2 के माध्यम से 2 फरवरी 2024 को हुई थी। वहीं वीरेंद्र प्रसाद मूल रूप से डुमरांव प्रखंड के सोवा गांव के रहने वाले बताए गए हैं। उनकी तैनाती वर्ष 2013 में म्यूचुअल तबादले के जरिए संबंधित विद्यालय में हुई थी।
निलंबन के दौरान वीरेंद्र प्रसाद का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, राजपुर और अरविंद कुमार का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, चक्की निर्धारित किया गया था।
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यालयों में इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विभागीय जांच में दोष प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।