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Tuesday, September 22, 2026

जमुई कांड में 6 आरोपियों के साथ अब क्या होगा? नाबालिगों को सुधार गृह या बालिग की तरह ट्रायल, जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

जमुई कांड में 6 आरोपियों के साथ अब क्या होगा? नाबालिगों को सुधार गृह या बालिग की तरह ट्रायल, जानिए पूरी कानूनी प्रक्रिया

जमुई। नाबालिग छात्रा से बदसलूकी और घटना का वीडियो वायरल होने के मामले में पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें तीन नाबालिग बताए जा रहे हैं, जबकि तीन आरोपी बालिग हैं। मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस ने भागने के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया है, जबकि हरेराम यादव का पैर टूट गया। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल है कि गिरफ्तार नाबालिग आरोपियों के साथ आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और बालिग आरोपियों पर कौन-कौन सी धाराओं में कार्रवाई हो सकती है।

18 साल से कम उम्र के आरोपी नाबालिग माने जाते हैं

कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को नाबालिग माना जाता है। ऐसे मामलों में किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के प्रावधान लागू होते हैं। वहीं 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के आरोपियों पर सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

जमुई मामले में जिन तीन आरोपियों की उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच बताई जा रही है, उनके खिलाफ आरोपों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO एक्ट की धाराएं लग सकती हैं।

नाबालिग आरोपियों को पुलिस लॉकअप में नहीं रखा जाता

नाबालिग आरोपी को सामान्य पुलिस लॉकअप या जेल में रखने के बजाय निर्धारित किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत पेश किया जाता है। पुलिस को ऐसे आरोपी को संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के समक्ष पेश करना होता है।

JJB यह देखता है कि आरोपी की उम्र क्या है, उसके खिलाफ क्या आरोप हैं और मामले की परिस्थितियां क्या हैं। इसके बाद बोर्ड तय करता है कि नाबालिग को जमानत दी जाए, किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाए या आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

गंभीर अपराध होने पर 16 से 18 साल के आरोपी का हो सकता है अलग आकलन

किशोर न्याय अधिनियम में 16 से 18 वर्ष के नाबालिग द्वारा किए गए गंभीर अपराधों के लिए विशेष प्रावधान हैं। यदि अपराध कानून की नजर में 'heinous offence' की श्रेणी में आता है, तो JJB आरोपी का प्रारंभिक आकलन कर सकता है।

इस आकलन में बच्चे की मानसिक और शारीरिक क्षमता, अपराध के परिणामों को समझने की क्षमता और परिस्थितियों को देखा जाता है। इसके आधार पर यह तय हो सकता है कि मामले को बच्चों की अदालत में भेजने की जरूरत है या नहीं।

हालांकि, किसी नाबालिग को सिर्फ आरोप लगने के आधार पर बालिग मानकर सजा नहीं दी जाती। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी है।

बालिग की तरह ट्रायल हुआ तो भी कुछ सीमाएं लागू

यदि कानून के तहत मामला Children's Court तक पहुंचता है, तो भी किशोर न्याय अधिनियम में नाबालिगों के लिए विशेष सुरक्षा प्रावधान हैं। ऐसे मामले में बच्चे को मृत्युदंड या बिना रिहाई की संभावना वाला आजीवन कारावास नहीं दिया जा सकता।

यदि मामला बालिग की तरह ट्रायल के लिए नहीं भेजा जाता है, तो किशोर न्याय व्यवस्था के तहत सुधारात्मक कदम अपनाए जा सकते हैं। इनमें शिक्षा, कौशल विकास, काउंसलिंग और व्यवहार सुधार जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

नाबालिगों को जमानत का प्रावधान

किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 के तहत नाबालिग को जमानत देने का प्रावधान है। हालांकि, कुछ परिस्थितियों में जमानत से इनकार किया जा सकता है, जैसे बच्चे के अपराधियों के संपर्क में जाने, न्याय प्रक्रिया प्रभावित करने या उसकी सुरक्षा को लेकर खतरा होने की आशंका।

इसलिए गंभीर आरोप होने के बावजूद नाबालिग की जमानत का फैसला JJB मामले की परिस्थितियों को देखकर करता है।

बालिग आरोपियों पर POCSO और BNS के तहत कार्रवाई

बालिग आरोपियों पर आरोपों की प्रकृति के आधार पर POCSO एक्ट और BNS की संबंधित धाराएं लगाई जा सकती हैं। वायरल वीडियो में नाबालिग छात्रा के साथ जबरदस्ती और आपत्तिजनक व्यवहार के आरोप सामने आए हैं।

POCSO की धारा 8 में बच्चे के यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराध के लिए सजा का प्रावधान है। वहीं धारा 12 यौन उत्पीड़न से संबंधित अन्य कृत्यों पर लागू हो सकती है। BNS की संबंधित धाराएं महिला की गरिमा भंग करने और जबरदस्ती से जुड़े आरोपों में लगाई जा सकती हैं।

कौन-कौन सी धाराएं अंतिम रूप से लागू होंगी और कितनी सजा बनती है, यह पुलिस की जांच, मेडिकल व अन्य साक्ष्यों और अदालत में आरोप तय होने पर निर्भर करेगा।

वीडियो वायरल करने वाले पर भी कार्रवाई

घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई की है। रामाशीष चौधरी को वीडियो वायरल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाला या आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करना कानून के तहत गंभीर मामला हो सकता है। इसलिए पुलिस ने लोगों से वीडियो को आगे शेयर नहीं करने की अपील की है।

अब तक गिरफ्तार 6 आरोपी

पुलिस कार्रवाई के अनुसार अब तक गिरफ्तार आरोपियों में नंदन यादव, हरेराम यादव, मिथिलेश कुमार, प्रमोद कुमार, गोलू कुमार और रामाशीष चौधरी के नाम सामने आए हैं। इनमें तीन आरोपियों के नाबालिग होने की जानकारी दी गई है।

पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर रही है। कुछ अन्य संदिग्धों की तलाश जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।

आगे क्या होगा?

अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया उम्र और आरोपों के आधार पर अलग-अलग होगी। बालिग आरोपियों को सामान्य आपराधिक न्याय प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा, जबकि नाबालिग आरोपियों की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष होगी।

नाबालिगों के मामले में JJB उनकी उम्र, अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों का आकलन करेगा। यदि मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है और आरोपी की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है, तो कानून के अनुसार प्रारंभिक आकलन की प्रक्रिया भी हो सकती है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। इस मामले में अंतिम धाराएं, आरोप और सजा अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होंगे।