वैशाली: 45 दिन बाद तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा अग्निवीर आदित्य का अस्थि कलश, मां ने बेटे की तस्वीर को चूमा और फूट-फूटकर रो पड़ी
अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में बादल फटने के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन में लापता हुए अग्निवीर जवान आदित्य कुमार का अस्थि कलश शनिवार को 45 दिन बाद उनके पैतृक गांव सैदपुर रजौली, वैशाली पहुंचा। बेटे की तस्वीर सामने आते ही मां ने पहले उसे सैल्यूट किया और फिर तस्वीर को चूमकर आंचल से पोंछा। मां ने भावुक होकर कहा, “बेटा, घर आने में तुमने देर कर दी।” इतना कहते ही वह फूट-फूटकर रोने लगीं।
आदित्य की अंतिम यात्रा में एक हजार से अधिक लोग शामिल हुए। ग्रामीणों ने भारत माता की जय और “आदित्य कुमार अमर रहें” के नारे लगाकर अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
अरुणाचल में बादल फटने के बाद हुए थे लापता
जानकारी के अनुसार, 15 अगस्त की सुबह अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी थी। इस हादसे में सात जवान लापता हो गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन में दो जवानों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि आदित्य समेत पांच जवानों का पता नहीं चल पाया था।
करीब डेढ़ महीने तक सेना और परिजन लापता जवानों की तलाश में जुटे रहे। बुधवार को हादसे वाली जगह के मलबे से आदित्य का शव बरामद हुआ। शव को बिहार लाना संभव नहीं होने के कारण अरुणाचल प्रदेश में ही सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अप्रैल 2025 में अग्निवीर बने थे आदित्य
सैदपुर रजौली निवासी आशुतोष कुमार के बड़े बेटे आदित्य कुमार अप्रैल 2025 में अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए थे। उनकी तैनाती अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली स्थित पासुपानी आर्मी कैंप में थी।
आदित्य के लापता होने की खबर के बाद से परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठा था। करीब 45 दिनों बाद जब उनका अस्थि कलश घर पहुंचा तो परिवार का दुख और गहरा हो गया।
छोटा भाई भी सेना में, सिक्किम में तैनात
आदित्य का छोटा भाई अनीश भी अग्निवीर है और फिलहाल सिक्किम में तैनात है। बड़े भाई के लापता होने की खबर के बाद वह छुट्टी लेकर घर आया था। अब भाई की मौत की खबर से पूरा परिवार सदमे में है।
गांव में निकली तिरंगा यात्रा
अस्थि कलश गांव पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने तिरंगा यात्रा निकाली। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, पूर्व सैनिक संघ के सदस्य और अधिकारी शामिल हुए। लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और आदित्य कुमार अमर रहें के नारे लगाए।
तिरंगा यात्रा के बाद आदित्य के अस्थि कलश को कोनहारा घाट ले जाया गया, जहां विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन किया गया। पूरे गांव ने नम आंखों से अपने वीर जवान को अंतिम विदाई दी।