सहरसा से जल्द भरेंगे विमान, 42.52 करोड़ का टेंडर जारी; 12 एकड़ जमीन के लिए सरकार खर्च करेगी 147 करोड़
सहरसा और पूरे कोसी क्षेत्र के लिए हवाई कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ी पहल शुरू हो गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने सहरसा एयरपोर्ट के विकास कार्य के लिए 42.52 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। एजेंसी के चयन के बाद निर्माण कार्य को करीब 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एयरपोर्ट का विकास DGCA के निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाएगा। निर्माण पूरा होने के बाद यहां से 20 से 30 सीटर छोटे विमान संचालित किए जाने की योजना है।
12 एकड़ अतिरिक्त जमीन के लिए 147 करोड़ रुपये
सहरसा एयरपोर्ट और रनवे के विस्तार के लिए करीब 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता है। इसके लिए बिहार सरकार अपने खर्च पर लगभग 147 करोड़ रुपये खर्च कर जमीन अधिग्रहण कर रही है। जिला प्रशासन और विमानन विभाग की ओर से जमीन अधिग्रहण समेत अन्य तैयारियां की जा रही हैं।
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराने की तैयारी है।
पटना समेत कई शहरों से जुड़ने की योजना
सहरसा एयरपोर्ट के विकसित होने के बाद इसे पटना, पूर्णिया, दरभंगा, गया, देवघर, वाराणसी और लखनऊ जैसे शहरों से जोड़ने की योजना बताई गई है। इसके लिए छोटे आकार के विमानों का संचालन प्रस्तावित है।
योजना के तहत डोर्नियर, बीचक्राफ्ट और सेसना जैसे 20-30 सीटर विमानों के संचालन की संभावना है। रनवे को लगभग 800 से 1200 मीटर तक विकसित किए जाने की बात कही गई है।
कोसी के लाखों लोगों को मिलेगा फायदा
सहरसा एयरपोर्ट के विकास से सहरसा के साथ-साथ सुपौल और मधेपुरा समेत पूरे कोसी क्षेत्र को हवाई सेवा का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे पटना और अन्य बड़े शहरों तक पहुंच आसान होगी।
हवाई सेवा शुरू होने से स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। कारोबारियों को बड़े बाजारों तक पहुंच आसान होगी और क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।
बाढ़ और आपदा के समय भी मिलेगी मदद
कोसी क्षेत्र हर साल बाढ़ की चुनौती से जूझता है। ऐसे में एयरपोर्ट के विकसित होने के बाद बाढ़ या अन्य आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में विमानों की मदद मिलने की उम्मीद है। जरूरी सामान और राहत दलों की आवाजाही भी आसान हो सकती है।
सहरसा की यह हवाई पट्टी पहले भी महत्वपूर्ण रही है और विभिन्न मौकों पर वीआईपी विमानों के लिए इस्तेमाल होती रही है। अब इसके व्यवस्थित विकास से कोसी क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी का नया रास्ता खुलने की उम्मीद है।