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सहरसा के DPO अजीत अमर के 4 ठिकानों पर EOU की रेड, आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई
सब-हेडलाइन:
सीवान, सहरसा और छपरा में एक साथ छापेमारी; जांच में 62.20 लाख की अतिरिक्त संपत्ति और 32 महीने में करोड़ों के लेन-देन का खुलासा
सहरसा/छपरा: आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने शुक्रवार सुबह आय से अधिक संपत्ति के मामले में सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई सीवान, सहरसा और छपरा स्थित उनके पैतृक, निजी और सरकारी परिसरों में की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में EOU को पता चला है कि अजीत अमर ने अपनी ज्ञात आय से 62 लाख 20 हजार 550 रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी वैध आय की तुलना में करीब 72.35 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
चार ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
EOU की टीम ने सीवान के दरौंदा प्रखंड स्थित रैनी गांव के पैतृक घर, सहरसा के नया बाजार स्थित किराए के आवास और जिला कार्यक्रम कार्यालय तथा छपरा की गंडक कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर एक साथ छापेमारी शुरू की। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही। सहरसा कार्यालय में कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई।
छपरा पोस्टिंग के दौरान करोड़ों का ट्रांजेक्शन
जांच में सामने आया कि अजीत अमर छह महीने पहले ही छपरा से स्थानांतरित होकर सहरसा आए थे। छपरा में 32 महीने की पोस्टिंग के दौरान उनकी कुल वेतन राशि 27.43 लाख रुपये थी, जबकि इसी अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 2 करोड़ 51 लाख 6 हजार 562 रुपये का लेन-देन हुआ। जांच समिति का मानना है कि वास्तविक अवैध संपत्ति का आंकड़ा 3 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।
पत्नी के नाम जमीन और आलीशान मकान
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अजीत अमर ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर एकमा प्रखंड में करीब 6 बीघा 9 कट्ठा 8 धुर जमीन लगभग 41.50 लाख रुपये में खरीदी। इसके अलावा करोड़ों रुपये की लागत से मकान निर्माण की भी जानकारी सामने आई है। समिति ने परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों और संपत्तियों की भी विस्तृत जांच की सिफारिश की है।
रिश्वत मांगने का भी आरोप
एक महीने पहले ठेकेदार रवि कुमार राम ने जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि शिक्षा विभाग में वेंडर का कार्य दिलाने के नाम पर DPO ने 12.50 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने तीन किस्तों में 10.70 लाख रुपये नकद और 1.03 लाख रुपये से अधिक डिजिटल माध्यम से DPO के परिजनों और रिश्तेदारों के खातों में भेजे थे।
शिकायत में यह भी कहा गया कि कार्य नहीं मिलने पर पैसे वापस मांगने पर ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी गई। बाद में केवल 1.53 लाख रुपये लौटाए गए, जबकि 10.79 लाख रुपये अब तक वापस नहीं किए गए।
जांच जारी
EOU की छापेमारी जारी है। टीम दस्तावेजों, बैंक खातों, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। कार्रवाई पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
